दिल्ली में वोटल लिस्ट दुरुस्त करने की कवायद तेज, अब तक 4.56 लाख नए आवेदन मिले; 1.15 लाख का निपटारा
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के बाद 47.56 लाख नाम हटने पर, नए नाम जोड़ने और रिकॉर्ड सुधारने ...और पढ़ें

वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का काम तेज। फोटो: आर्काइव
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद छूटे पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों को दूर करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
31 अगस्त को जारी प्रारूप मतदाता सूची से करीब 47.56 लाख नाम बाहर होने के बाद अब घर-घर सत्यापन और रविवार के विशेष कैंप के जरिये मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
20 अक्टूबर तक नए नाम जोड़ने के लिए 4,56,913 फॉर्म -6 आवेदन मिल चुके थे, जिनमें से करीब 1.15 लाख का निस्तारण किया गया है। हालांकि, पते में बदलाव, किरायेदारों के दूसरी जगह जाने और ऑनलाइन आवेदन में आ रही दिक्कतों के कारण पात्र मतदाताओं तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर पहले 11 अक्टूबर तक फॉर्म -6 के निस्तारण के केवल 1,238 आवेदन दिखाए गए थे। अब 20 अक्टूबर तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 1.15 लाख दर्ज है।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, पहले वेबसाइट पर गलत आंकड़े अपलोड हो रहे थे, जिन्हें अब ठीक किया गया है। कुल आवेदनों में करीब 2.12 लाख आवेदन 30 अगस्त तक और लगभग 2.45 लाख आवेदन 31 अगस्त से 20 अक्टूबर के बीच प्राप्त हुए।
बीएलओ की चुनौती
जमीनी स्तर पर किरायेदारों और कामकाजी लोगों तक पहुंचना बीएलओ के लिए मुश्किल हो रहा है। पिलंजी गांव के एक बीएलओ के अनुसार, उनके क्षेत्र में करीब 95 प्रतिशत आबादी किरायेदारों की है।
दिन में नौकरी या मजदूरी पर जाने वाले लोग घर पर नहीं मिलते, जबकि मकान बदलने पर पुराने पते पर उनका सत्यापन नहीं हो पाता।
आनलाइन आवेदन से लेकर बुजुर्गों तक की परेशानी
26 वर्षीय भूपेंद्र पिलंजी गांव से लक्ष्मीबाई नगर चले गए थे। पते से जुड़ी समस्या के कारण उनका नाम प्रारूप सूची से बाहर हो गया। आनलाइन फॉर्म -6 भरने में सफलता नहीं मिली तो उन्हें कैंप में जाना पड़ा।
वहीं, जामिया नगर के बुजुर्ग नईमुद्दीन और उनकी पत्नी के नाम स्थायी रूप से स्थानांतरित श्रेणी में दर्ज हो गए, जबकि उनका कहना था कि उन्होंने गणना फॉर्म जमा किया था। उन्हें दोबारा फॉर्म -6 भरने की सलाह दी गई।
33.12 लाख नोटिस के मामलों पर भी नजर
वर्ष 2002 की मतदाता सूची से रिकॉर्ड नहीं मिलने या विवरण में विसंगति के कारण करीब 33.12 लाख नोटिस जारी किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक मामलों का समाधान हो चुका है।
इन मामलों के निस्तारण के साथ नए नाम जोड़ने और बाहर हुए मतदाताओं के दोबारा सत्यापन का काम भी जारी है।
रविवारीय शिविर बन रहे मददगार
रविवार के शिविर में मतदाता एक जगह आवेदन, दस्तावेज और शिकायत संबंधी मदद ले सकते हैं। लेकिन कम जागरूकता, नौकरी और दूसरी व्यस्तताओं के कारण कई लोग वहां नहीं पहुंच पाते।
घर-घर सत्यापन से बुजुर्गों, कामगारों और दूसरी जगह जाने वाले मतदाताओं तक पहुंचने का अवसर मिलता है। दोनों व्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं।
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