दिल्ली की वोटर लिस्ट से कटेंगे 44 लाख नाम, विशेष अभियान और शिविरों के बाद भी नहीं आए आवेदन
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 44 लाख से अधिक मतदाताओं का नाम कटना लगभग तय ...और पढ़ें
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दिल्ली के वोटर लिस्ट से कटेंगे नाम, जागरण।
HighLights
दिल्ली मतदाता सूची से 44 लाख से अधिक नाम हटाए जाएंगे।
विशेष पुनरीक्षण के बाद समयसीमा अब नहीं बढ़ेगी।
नाम जुड़वाने के लिए अपेक्षित आवेदन नहीं मिले।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची से 44 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कटना तय है।
चार बार समयसीमा बढ़ाए जाने, विशेष शिविर लगाने और 10 दिवसीय विशेष सत्यापन अभियान चलाए जाने के बावजूद कटे नामों को दोबारा जुड़वाने के लिए अपेक्षा के अनुरूप आवेदन नहीं आए हैं।
ऐसे में अब समयसीमा और बढ़ाए जाने की संभावना नहीं है। हालांकि इसे लेकर अंतिम निर्णय केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देश पर होगा। मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए आयोग कुछ भी निर्देश दे सकता है।
लोगों ने मतदाता सूची में नहीं जुड़वाया नाम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) दिल्ली कार्यालय के अनुसार, 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में राजधानी के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.53 लाख के नाम शामिल थे। यानी 67.26 प्रतिशत मतदाताओं के नाम ही सूची में दर्ज हुए, जबकि 47.56 लाख नाम हटाए गए।
कटे नामों की स्थिति दोबारा जांचने के लिए हाल ही में 10 दिन का विशेष सत्यापन अभियान चलाया गया। रविवार समेत विभिन्न अवसरों पर विशेष शिविर भी लगाए गए, लेकिन बड़ी संख्या में लोग नाम जुड़वाने के लिए सामने नहीं आए।
अभी भी पांच दिनों का समय बाकी
सीईओ कार्यालय अधिकारियों के मुताबिक दोबारा नाम जुड़वाने के लिए अभी तक 2,57,726 आवेदन ही आए हैं। अंतिम तिथि यानी 30 अक्टूबर तक बचे हुए पांच दिनों में यह आंकड़ा तीन लाख भी पहुंचने के आसार नहीं हैं।
अधिकारियों का मानना है कि अगर बड़ी संख्या में गलत तरीके से नाम हटाए गए होते तो अब तक अधिक लोग सामने आ चुके होते। अधिकारियों के मुताबिक, वैसे भी 43 लाख से अधिक मतदाता स्थायी रूप से राजधानी छोड़ चुके हैं, जबकि 2.82 लाख से ज्यादा मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है।
1.05 करोड़ मतदाता रहने का अनुमान
चुनाव अधिकारियों के अनुसार फिलहाल ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97.53 नाम हैं। नाम जुड़वाने के लिए आए आवेदनों के साथ ही नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए आए लगभग 4.5 लाख आवेदन भी सूची में जोड़े जाएंगे। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची में एक करोड़ पांच लाख के आसपास नाम हो जाएंगे।
चुनावों के मतदान आंकड़ों की भी पड़ताल
निर्वाचन अधिकारियों ने समीक्षा के दौरान पिछले चुनावों के मतदान प्रतिशत का भी अध्ययन किया। फरवरी 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 60.42 प्रतिशत मतदान हुआ था। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में यह 62.59 प्रतिशत और 2024 के लोकसभा चुनाव में 58.69 प्रतिशत रहा था। मतलब यह कि मतदान न करने वाले मतदाताओं को भी मिलाकर यह आंकड़ा अधिकतम 70 से 75 प्रतिशत जाएगा। मतदाता सूची के शेष नाम बेमानी हें।
30 लाख नोटिसों का निस्तारण
2002 की मतदाता सूची से रिकार्ड न मिलने या विवरण में विसंगति के कारण करीब 33.12 लाख नोटिस जारी किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 30 लाख नोटिसों का निस्तारण हो चुका है। 30 अक्टूबर के बाद सत्यापन कर इनमें से अधिकांशत: नाम जुड़ जाएंगे।
