दिल्ली में पैदल यात्रियों और साइकिल ड्राइवरों की अनदेखी, सीएसई ने पेश किाए चौंकाने वाले आंकड़े
राष्ट्रीय राजधानी में परिवहन नियोजन पर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, ...और पढ़ें
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HighLights
दिल्ली में 38.9% लोग पैदल या साइकिल का उपयोग करते हैं।
सड़कों का 90% हिस्सा कारों द्वारा घेरा जाता है, जबकि 6.4% कारें हैं।
फुटपाथों पर अतिक्रमण और सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी बड़ी समस्या।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के परिवहन नियोजन को लेकर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं।
''स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट'' 2026 रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बुनियादी ढांचा मोटर वाहनों के हिसाब से विकसित किया जा रहा है, जबकि असलियत में शहर की एक बहुत छोटी आबादी ही चौपहिया वाहनों का इस्तेमाल करती है।
सड़कों पर असमानता : छह प्रतिशत कारें, 90 प्रतिशत कब्जा
सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने बताया कि दिल्ली में महज 6.4 प्रतिशत लोग कारों का उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, 38.9 प्रतिशत लोग आज भी नान-मोटराइज्ड व्हीकल (साइकिल या पैदल) का सहारा लेते हैं।
विडंबना यह है कि सड़कों का 90 प्रतिशत हिस्सा कारें घेरती हैं, जबकि साइकिल सवारों और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित फुटपाथ या लेन का अभाव है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बड़ी आबादी पैदल या साइकिल से चलती है, तो शहर की पूरी प्लानिंग केवल फ्लाईओवर एवं सड़कों को चौड़ा करने तक ही सीमित क्यों है?
फुटपाथ और साइकिल ट्रैक का हाल
दिल्ली में फुटपाथ और साइकिल ट्रैक की स्थिति मिश्रित है। लुटियंस दिल्ली और द्वारका जैसे इलाकों में सुव्यवस्थित ट्रैक हैं जबकि कई मुख्य सड़कों पर अतिक्रमण और रखरखाव की कमी देखी जाती है।
नई परियोजनाएं (यमुना रिवर फ्रंट) : यमुना के पश्चिमी किनारे पर 21 किमी और पूर्वी तरफ 30 किमी का नया और सुव्यवस्थित साइकिल ट्रैक विकसित किया जा रहा है। यह वजीराबाद से एनएच -24 होते हुए कालिंदी कुंज तक होगा, जिसे अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है।
द्वारका में आधुनिक ट्रैक : द्वारका उपनगरी में लगभग 60 किमी लंबा साइकिल ट्रैक नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जो देश में सबसे लंबा हो सकता है।
लुटियंस दिल्ली : इंडिया गेट-लोधी गार्डन क्षेत्र में ''साइकिल4चेंज'' पहल के तहत पांच किमी लंबा ट्रैक बना है।
समस्याएं : दिल्ली में लगभग 80 प्रतिशत से अधिक फुटपाथों पर रेहड़ी-पटरी वालों और दुकानदारों का अवैध कब्जा है, पुराने साइकिल ट्रैक भी अतिक्रमण का शिकार हैं। इस कारण राहगीरों और साइकिल चालकों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
मौतों के आंकड़े : साल 2025 में 2,192 सड़क हादसों में 649 पैदल यात्रियों की मौत हुई जो 2024 (584 मौतें) से अधिक है।
बुनियादी ढांचे की कमी : शहर में व्यवस्थित फुटपाथ और सुरक्षित जेब्रा क्रासिंग ही नहीं, अंडरपास का भी अभाव है।
रिपोर्ट में दिए गए सुझाव
फुटपाथों का सुधार और निरंतरता सुनिश्चित करनी होगी। सुरक्षित सड़क पार करने की सुविधाएं, जैसे ज़ेब्रा क्रासिंग, लाइटिंग और ट्रैफिक सिग्नल, बढ़ाए जाने चाहिए। महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नीतियां बनाई जाएं। फुटपाथ से पार्किंग को हटाया जाए और उन्हें अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए।
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वहीं, योजना के तहत फुटपाथ पर स्ट्रीट वेंडर्स को लाया जाए। सड़क पार करने के लिए सुविधाएं बढ़ाई जाएं। दोपहिया वाहनों को फुटपाथ पर चलने से रोका जाए। इंडियन रोड कांग्रेस (आइआरसी) के मानक के अनुरूप 15 सेंटीमीटर ऊंचे ही फुटपाथ बनाए जाएं।
