दिल्ली में जाम के कारण बढ़ रहा प्रदूषण, सड़कें बनीं हॉटस्पॉट; 10 मिनट में कितना धुआं छोड़ रहीं गाड़ियां?
दीवाली से पहले दिल्ली में यातायात जाम प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों को बाधित कर रहा है। वाहनों के उत्सर्जन और सीमाओं ...और पढ़ें

एनएच 9 पर गाजीपुर के पास लगा यातायात जाम। फोटो-पी.कुमार
HighLights
दीवाली से पहले दिल्ली की हवा अत्यंत खराब स्थिति में।
यातायात जाम से वाहनों का उत्सर्जन बढ़ रहा, सड़कें हॉटस्पॉट।
बीएस-6 जांच से सीमाओं पर लंबी कतारें, प्रदूषण बढ़ा।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दीवाली से पहले ही दिल्ली की हवा अत्यंत खराब स्थिति में पहुंच गई है। वहीं, सड़कों पर जाम प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों के सामने नई चुनौती बन गया है। त्योहार की खरीदारी के लिए बाजारों में बढ़ी भीड़ और एनसीआर से दिल्ली आने वाले वाहनों के कारण प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित है।
दूसरी ओर, बीएस-6 से नीचे के वाहनों की जांच के चलते दिल्ली की सीमाओं पर भी लंबी कतारें लग रही हैं। गुरुग्राम के सरहौल बार्डर पर वाहनों की लंबी कतार लगी, जबकि गाजीपुर समेत अन्य सीमाओं पर भी जाम रहा। ऐसे में प्रदूषण घटाने की पाबंदी के दौरान जाम खुद अतिरिक्त प्रदूषण का कारण बन रहा है। सड़कें हाट स्पाट बन गई हैं।
जाम में फंसी गाड़ियों से बढ़ रहा उत्सर्जन
जाम में इंजन चालू रहने से ईंधन की खपत और कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन बढ़ता है। अनुमान के अनुसार, पेट्रोल कार का इंजन निष्क्रिय रहने पर प्रति मिनट करीब 30.7 ग्राम कार्बन डाइआक्साइड निकलती है।
सरहौल बार्डर पर 400 कारें 10 मिनट तक इंजन चालू रखकर फंसी रहें तो करीब 123 किग्रा कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जित होती है।
#WATCH | Delhi: Traffic snarl near Ghazipur Highway amid the festive rush. Visuals shot around 4 pm today. https://t.co/ESpfdzHSVT
— ANI (@ANI) November 6, 2026
20 मिनट में यह मात्रा 245 किग्रा तक पहुंच जाती है। गाजीपुर बार्डर पर 30 से 40 वाहनों की कतार में 10 से 20 मिनट के इंतजार के दौरान 9 से 25 किग्रा उत्सर्जन का अनुमान है।
वाहन प्रदूषण दिल्ली की हवा का बड़ा स्रोत
टेरी की 2021 की प्रारूप उत्सर्जन सूची के अनुसार, दिल्ली के पीएम 2.5 उत्सर्जन में वाहनों की हिस्सेदारी करीब 47 प्रतिशत, नाइट्रोजन आक्साइड में 78 प्रतिशत और गैर-मीथेन वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों में 49 प्रतिशत थी। सर्दियों में हवा में परिवहन क्षेत्र का योगदान 15 से 20 प्रतिशत आंका गया है।
जांच व्यवस्था में सुधार जरूरी
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी कहती हैं कि पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को रोकना जरूरी है, लेकिन जांच ऐसी हो कि सीमाओं पर जाम न लगे। इसके लिए स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली, पहले से पात्रता जांच, पर्याप्त जांच लेन और अलग होल्डिंग क्षेत्र की जरूरत है। बाजारों और व्यस्त सड़कों पर भी यातायात प्रबंधन मजबूत करना होगा। प्रदूषण नियंत्रण की सफलता रोके गए वाहनों और चालान के साथ उत्सर्जन में वास्तविक कमी तथा जाम से बढ़े प्रदूषण के आकलन से भी तय होनी चाहिए।
10 मिनट में कितना उत्सर्जन?
एक सामान्य पेट्रोल कार एक घंटे में करीब 0.8 लीटर ईंधन खर्च करे तो 10 मिनट इंजन चालू रहने पर 133 मिलीलीटर पेट्रोल जलेगा और करीब 307 ग्राम कार्बन डाइआक्साइड निकलेगी। इसी अवधि में 0.6 लीटर प्रति घंटे की खपत वाली डीजल कार करीब 100 मिलीलीटर ईंधन जलाकर 268 ग्राम कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जित करेगी।
यानी दोनों कारों से 10 मिनट में करीब 575 ग्राम उत्सर्जन होगा। यह अनुमान पेट्रोल के लिए 2.31 किग्रा और डीजल के लिए 2.68 किग्रा कार्बन डाइआक्साइड प्रति लीटर के गुणक पर आधारित है।
वास्तविक मात्रा वाहन के माडल, इंजन क्षमता, एसी और रखरखाव पर निर्भर करती है। दिल्ली के 11 यातायात चौराहों पर 341 वाहनों के परीक्षण पर आधारित अध्ययन में भी जाम के दौरान ईंधन की बर्बादी और उत्सर्जन का आकलन किया गया था।
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