यमुना में गंदा पानी रोकने की तैयारी, दिल्ली में बनेंगे 35 डीएसटीपी और 13 एसटीपी; दोगुनी करेंगे शोधन क्षमता
दिल्ली यमुना में गंदा पानी जाने से रोकने के लिए सीवेज प्रबंधन को अगले ढाई वर्षों में 35 विकेंद्रीकृत और ...और पढ़ें

यमुना में गिरने वाले गंदे पानी को पूरी तरह रोकने के लिए दिल्ली में सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था को बड़े स्तर पर बदलने की तैयारी है। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
अगले ढाई वर्षों में सीवेज शोधन क्षमता दोगुनी करने की योजना।
दिल्ली में 35 विकेंद्रीकृत और 13 नए सीवेज उपचार संयंत्र लगेंगे।
7,373 करोड़ रुपये की परियोजना, NMCG से वित्तीय सहायता मिलेगी।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। यमुना में गिरने वाले गंदे पानी को पूरी तरह रोकने के लिए दिल्ली में सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था को बड़े स्तर पर बदलने की तैयारी है। अगले ढाई वर्षों में सीवेज शोधन क्षमता दोगुनी करने की योजना है। इसके लिए 35 विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्र (डीएसटीपी) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही] 13 नए सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) भी स्थापित किए जाएंगे।
परियोजना पर करीब 7,373 करोड़ रुपये खर्च होंगे
'नेशनल मिशन फाॅर क्लीन गंगा' (एनएमसीजी) की वित्तीय मदद से प्रस्तावित इस परियोजना पर करीब 7,373 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दिल्ली जल बोर्ड ने इस परियोजना को स्वीकृति दे दी है और जल्द ही इसके लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 328 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) होगी। दिल्ली में इस समय 37 एसटीपी हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 814 एमजीडी सीवेज शोधन की है।
8 एसटीपी का उन्नयन कार्य पूरा हुआ
राजधानी में प्रतिदिन लगभग इतनी ही मात्रा में सीवेज उत्पन्न होता है। इसके बावजूद यमुना में प्रदूषण का एक बड़ा कारण कई इलाकों में सीवर नेटवर्क का अभाव और कुछ एसटीपी का निर्धारित मानकों के अनुरूप काम न करना है।
ऐसे में एसटीपी की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उनका उन्नयन भी किया जा रहा है। 28 एसटीपी का उन्नयन कार्य पूरा हो गया है और अगले वर्ष दिसंबर तक शेष नौ एसटीपी का उन्नयन कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा।
किन स्थानों पर बनाए जाएंगे एसटीपी
दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2028 तक दिल्ली की कुल सीवेज शोधन क्षमता बढ़ाकर 1,500 एमजीडी करने की योजना है।
जागृति, कोंडली, रोहिणी, पप्पनकलां, रिठाला, केशवपुर, कोरोनेशन पिलर, आईएसपी बुराड़ी कैंपस, निलोठी, कैलाश नगर, शास्त्री पार्क, आरएमई-180 ड्रेन इंटरसेप्शन और दिल्ली गेट में बनने वाले एसटीपी इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इसके साथ ही पुराने एसटीपी के उन्नयन से दिसंबर 2027 तक करीब 56 एमजीडी अतिरिक्त क्षमता बढ़ेगी, वहीं 35 डीएसटीपी से लगभग 170 एमजीडी क्षमता में वृद्धि होगी।
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