दिल्ली: समाज कल्याण विभाग में कर्मचारियों की किल्लत, लटकीं SC-ST योजनाएं और छात्रवृत्ति
दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग में कर्मचारियों की कमी से अनुसूचित जाति और जनजाति की कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

दिल्ली सरकार का समाज कल्याण विभाग (साभार: समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट)
HighLights
कल्याणकारी योजनाओं और छात्रवृत्ति में हो रही देरी।
नेहरू ब्वायज, कमला नेहरू गर्ल्स हास्टल प्रभावित।
विभाग में 25 में से 13 पद खाली।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के समाज कल्याण एवं एससी-एसटी विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो रही है।
इसका असर छात्रवृत्ति योजनाओं, मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं में संशोधन और दो छात्रावासों को पूरी तरह संचालित करने की तैयारी पर भी पड़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, कर्मचारियों की कमी के चलते जिन फाइलों और प्रस्तावों के निपटारे में सामान्य तौर पर एक महीने का समय लगता था, उनमें अब करीब तीन महीने लग रहे हैं।
विभाग ने इस समस्या को लेकर जुलाई में ही सेवा विभाग को पत्र लिखकर रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग की थी। पत्र में स्पष्ट किया गया था कि कर्मचारियों की कमी से न केवल कल्याणकारी कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि नेहरू ब्वायज हास्टल और कमला नेहरू गर्ल्स हास्टल को पूरी तरह शुरू करने की तैयारी भी बाधित हो रही है।
इस साल दोनों छात्रावास शुरू करने का लक्ष्य
अधिकारी के अनुसार, एससी-एसटी-ओबीसी कल्याण मंत्री ने निर्देश दिए थे कि दोनों छात्रावासों को चालू वर्ष के दौरान पूरी तरह संचालित किया जाए।
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जरूरी पदों को समय पर भरना महत्वपूर्ण है। विभाग ने सेवा विभाग से तबादले, तैनाती या अन्य प्रशासनिक व्यवस्था के जरिये प्राथमिकता पर रिक्त पद भरने का अनुरोध किया था। इसके लिए 15 दिन के भीतर कार्रवाई करने का आग्रह भी किया गया था।
25 में से 13 पद खाली
विभाग की ओर से भेजे गए पत्र में छह श्रेणियों के कुल 25 स्वीकृत पदों का ब्योरा दिया गया था। इनमें से 12 पदों पर कर्मचारी तैनात थे, जबकि 13 पद खाली थे। यानी आधे से अधिक पद रिक्त होने से विभाग के कामकाज पर दबाव बढ़ गया है।
उप निदेशक और हरिजन कल्याण बोर्ड के सचिव का एक-एक पद खाली है। तीन स्वीकृत अनुभाग अधिकारी पदों में से दो भरे हैं। वहीं, सहायक अनुभाग अधिकारी के पांच पदों में से तीन पर ही कर्मचारी तैनात हैं। कनिष्ठ सहायकों के 13 स्वीकृत पदों में से सात खाली हैं।
कर्मचारियों की इस कमी का सीधा असर योजनाओं की प्रक्रिया और प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। ऐसे में रिक्त पदों को भरना जरूरी है, ताकि छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंच सके और दोनों छात्रावासों को शुरू करने का लक्ष्य पूरा हो सके।
