दिल्ली के सरकारी स्कूलों में इडली-सांभर का अब भी इंतजार, अगस्त में आदेश के बाद भी नहीं हुआ लागू
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में इडली-सांभर को मिड-डे मील में शामिल करने की योजना अगस्त में आदेश के बावजूद लागू ...और पढ़ें

शिक्षा निदेशालय की ओर से अगस्त में मिड-डे मील के साप्ताहिक मेन्यू में बदलाव कर इडली-सांभर शामिल किया गया था। जो अब भी लागू नहीं हो सका है। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
अगस्त में इडली-सांभर मिड-डे मील में शामिल करने का आदेश।
उपकरणों की कमी से स्कूलों में लागू नहीं हो पाया मेन्यू।
बच्चों को अभी भी पुराना भोजन ही परोसा जा रहा है।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी के सरकारी स्कूलों में बच्चों को इडली-सांभर परोसने की योजना अब तक लागू नहीं हो सकी है। शिक्षा निदेशालय की ओर से अगस्त में मिड-डे मील के साप्ताहिक मेन्यू में बदलाव कर इडली-सांभर शामिल किया गया था। इसे 24 अगस्त तक शुरू करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन रसोई में जरूरी उपकरणों और अन्य व्यवस्थाओं की कमी के चलते स्कूलों में अब भी पुराना मेन्यू ही चल रहा है।
इडली-सांभर परोसना मुश्किल
स्कूल प्रतिनिधियों के मुताबिक, इडली बनाने के लिए विशेष उपकरणों की जरूरत है, जो कई स्कूलों की रसोई में उपलब्ध नहीं हैं। सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के संगठन के एक सदस्य ने बताया कि जब तक जरूरी उपकरण और अन्य व्यवस्थाएं नहीं होंगी, तब तक नियमित भोजन में इडली-सांभर परोसना मुश्किल है।
शिक्षा निदेशक ने नहीं दिया कोई जवाब
एक सरकारी स्कूल की स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्य ने भी बताया कि बच्चों को अब तक आलू-पूरी, करी-चावल, हलवा और दलिया जैसे पुराने मेन्यू के अनुसार ही भोजन दिया जा रहा है।
उनके मुताबिक, मेन्यू में बदलाव करना केवल कागजों पर नई डिश शामिल करने तक सीमित नहीं है।
इसके लिए सामग्री, उपकरण, भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों और समय पर सभी स्कूलों तक खाना पहुंचाने की व्यवस्था भी करनी होती है। संशोधित मेन्यू को लागू करने की मौजूदा स्थिति पर शिक्षा निदेशक ने कोई जवाब नहीं दिया।
अगस्त में बदला गया था छह दिन का मेन्यू
शिक्षा निदेशालय ने अगस्त में पीएम-पोषण योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के साप्ताहिक मेन्यू में बदलाव किया था। नए मेन्यू में छह दिनों के लिए अलग-अलग भोजन निर्धारित किए गए थे। इनमें काले चने की ग्रेवी और मसली हुई सब्जियों के साथ पूरी, इडली-सांभर, छोले और मसली हुई सब्जियों के साथ चावल, छोले के साथ पूरी, दाल-चावल और कढ़ी-चावल शामिल हैं।
दलिये की जगह ज्वार और बाजरे को शामिल किया
विभाग ने बताया था कि भोजन समीक्षा समिति ने पुराने मेन्यू, बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की स्थिति, संबंधित पक्षों के सुझाव और योजना के क्रियान्वयन के अनुभवों की समीक्षा के बाद बदलाव की सिफारिश की थी। नए मेन्यू में रागी के हलवे की जगह गेहूं के आटे और चना मसाला तथा सब्जियों वाले दलिये की जगह ज्वार और बाजरे को शामिल किया गया था।
एजेंसियों को दो सप्ताह का समय, फिर भी इंतजार
शिक्षा निदेशालय ने अधिकांश बदलाव तत्काल लागू करने को कहा था, जबकि इडली-सांभर शुरू करने के लिए संबंधित गैर-सरकारी संगठनों और केंद्रीकृत रसोई संचालित करने वाली एजेंसियों को अधिकतम दो सप्ताह का समय दिया गया था।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया था कि सामग्री की उपलब्धता और व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग स्कूलों में एक ही दिन अलग स्वीकृत व्यंजन परोसे जा सकते हैं, लेकिन हर स्कूल में छह दिन के पूरे मेन्यू का पालन करना अनिवार्य है। आरके पुरम के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य ने कहा कि स्कूलों में नया मेन्यू लागू नहीं हुआ है।
