दिल्ली में सांसों पर संकट: सड़कों पर जमी धूल बढ़ा रही प्रदूषण, सर्दी से पहले टेंशन में लाखों लोग
दिल्ली में सड़कों पर जमा धूल वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा रही है, जिससे सर्दियों से पहले ही दिल्लीवासियों की चिंता बढ़ गई है।
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दिल्ली में सड़कों पर जमा धूल वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा रही है। AI जनरेटेड
HighLights
दिल्ली की सड़कों पर धूल से बढ़ रहा वायु प्रदूषण।
न्यू रोहतक रोड, यमुनापार में धूल की मोटी परत।
खराब सड़कें और सफाई का अभाव मुख्य कारण।
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने का समय नजदीक आते ही सड़कों पर जमा धूल चिंता बढ़ाने लगी है।
प्रदूषण के लिए केवल रिंग रोड ही नहीं बल्कि दिल्ली की कई अन्य प्रमुख सड़कों पर जमा धूल भी हवा की गुणवत्ता खराब करने में योगदान दे रही है।
न्यू रोहतक रोड समेत कई इलाकों में फुटपाथ ही नहीं सड़कों के मुख्य भागों पर धूल की मोटी परत दिखाई दे रही है। वाहनों के गुजरने के साथ यही धूल हवा में उड़कर आसपास के वातावरण को प्रभावित कर रही है।
वाहन ड्राइवर धूल से परेशान
न्यू रोहतक रोड पर स्थिति विशेष रूप से परेशान करने वाली है। इस मार्ग पर रानी झांसी रोड टी-प्वाइंट से जखीरा तक करीब छह किलोमीटर भाग में वाहन ड्राइवर धूल से परेशान होते हैं। वाहन ड्राइवर 20 से 25 मिनट तक धूल भरे माहौल में रहते हैं। इससे खासकर दो पहिया ड्राइवर अधिक परेशान हैं।
वहीं, आसपास के रहने वाले लोग भी लोक निर्माण विभाग में शिकायत कर चुके हैं। यहां धूल का कारण टूटी सड़क और गड्ढे भरने के लिए डाले गए ईंटों के टुकड़ों का मिट्टी बन जाना है। वाहन गुजरते हैं तो मिट्टी उड़ती है।
उधर, यमुनापार के प्रमुख फ्लाईओवर अप्सरा बॉर्डर फ्लाईओवर, अप्सरा बॉर्डर से आनंद विहार की ओर जाने वाले फ्लाईओवर के साथ साथ अशोेक नगर, लोनी गोलचक्कर, गोकलपुरी से लेकर शाहदरा फ्लाईओवर के ऊपर धूल मौजूद है। यह हाल नियमित सफाई न हाेने के कारण है।
नारायणा, मंगोलपुरी, न्यू मोती नगर व रानी झांसी फ्लाईओवर पर भी सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। इसके अलावा सड़कों पर भी धूल से बुरा हाल है। उधर माेदी मिल से कालकाजी फ्लाईओवर तक निर्माण कार्य के कारण धूल हो रही है। मथुरा रोड पर भी धूूल का नजारा देखा जा सकता है।
प्रदूषण की समस्या गंभीर
बता दें कि राजधानी में सर्दियों के दौरान पहले से ही प्रदूषण की समस्या गंभीर हो जाती है। सरकारी स्तर पर धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव, सड़कों की सफाई और निर्माण स्थलों पर धूल रोकने जैसे उपाय किए जाते हैं, लेकिन अधिकतर जगह इनका असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा है।
लोक निर्माण विभाग के पूर्व प्रमुख अभियंता दिनेश कुमार ने कहा कि धूल प्रदूषण रोकने के लिए अक्टूबर से व्यवस्थाएं सड़कों पर दिखाई देने लगनी चाहिए, अन्यथा प्रदूषण रोकने के लिए प्रयास कारगर हाेने में समस्या आएगी।
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