दिल्ली में कानफोड़ू शोर छीन रहा सुकून! दिल और दिमाग की सेहत पर मंडराया गंभीर खतरा
दिल्ली की सड़कों पर बढ़ता ध्वनि प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है, जिससे नींद, एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
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निषादराज मार्ग से लाल किला में जाने के लिए यूटर्न हो रहे वाहनों के कारण बन रही जाम की स्थिति। चंद्र प्रकाश मिश्र
HighLights
सड़क यातायात दिल्ली में ध्वनि प्रदूषण का प्रमुख कारण।
लगातार शोर से दिल, दिमाग और एकाग्रता पर असर।
सीएसआईआर-एनपीएल ने 201 स्थानों पर ध्वनि स्तर मापा।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली की हवा तो दम घोंट ही रही है, अब सड़कों का शोर भी दिल और दिमाग पर चोट कर रहा है। रेड लाइट पर खड़े-खड़े बेवजह बजता हॉर्न, जाम में फंसी गाड़ियों का शोर और मॉडिफाइड बाइकों की कानफोड़ू आवाज ने सड़क यातायात को शोर का बड़ा स्रोत बना दिया है।
वहीं, लगातार शोर के संपर्क में रहने से नींद, एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक अधिक शोर के संपर्क को उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़ते जोखिम से भी जोड़ा गया है।
201 स्थानों के आंकड़ों से तैयार हुआ नया अध्ययन
दिल्ली में ध्वनि प्रदूषण की समस्या को समझने के लिए विज्ञानियों ने एक नया मॉडल विकसित किया है। सीएसआइआर- एनपीएल के डा सौरभ कुमार और डॉ. नवीन गर्ग का एक शोधपत्र इंटीग्रेटेड लैंड यूज रिग्रेशन मॉडल विद रोड ट्रैफिक कैरेक्टरिस्टिक्स फार एनवायरनमेंटल नोएज प्रिडिक्शन एंड मैपिंग इन अर्बन रीजन 5 नवंबर 2025 को शोध पत्रिका एप्लाइड एकास्टिक्स में प्रकाशित हुआ। इसमें दिल्ली के 201 स्थानों पर किए गए 24 घंटे के ध्वनि मापन के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया।
आंकड़े अक्टूबर 2023 से जून 2024 के बीच जुटाए गए थे। शोधकर्ताओं ने ध्वनि के स्तर का आकलन करने के लिए वाहनों की संख्या, उनकी औसत गति और हार्न बजाने की घटनाओं को भी शामिल किया।
अध्ययन में तैयार चार मॉडल ने दिन, रात, 24 घंटे और दिन-रात के संयुक्त ध्वनि स्तर का अनुमान लगाने में अच्छा प्रदर्शन किया। इनमें वाहनों की संख्या शोर के अलग-अलग स्थानों पर बदलते स्तर को समझाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक रही।
रिहायशी इलाकों में भी शोर चिंता का विषय
मानकों के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में दिन में ध्वनि की निर्धारित सीमा 55 डेसीबल और रात में 45 डेसीबल है। व्यावसायिक क्षेत्रों में यह सीमा क्रमश: 65 और 55 डेसीबल है। अधिसूचित शांत क्षेत्रों में दिन के समय 50 और रात में 40 डेसीबल की सीमा निर्धारित है।
दिल्ली के कुछ प्रमुख हॉटस्पॉट
- जहांगीरपुरी
- अशोक विहार
- करोल बाग
- कश्मीरी गेट
- आनंद विहार
- सोनिया विहार
- वजीरपुर
- मंदिर मार्ग
- पंजाबी बाग
- मुंडका
- रोहिणी
अध्ययन के आधार पर शोर की समस्या कहां अधिक
- व्यस्त सड़कें और चौराहेः वाहनों की अधिक संख्या शोर का सबसे प्रभावशाली कारक रही।
- हॉर्न वाले मार्गः दिन के समय और 24 घंटे के औसत शोर में हार्न की आवृत्ति भी महत्वपूर्ण रही।
- प्रमुख सड़क और राजमार्ग के आसपास के इलाके: सड़क नेटवर्क और यातायात की स्थिति का शोर के फैलाव से संबंध मिला।
- रात के समयः सड़कों और रेलवे स्टेशनों से निकटता भी महत्वपूर्ण कारकों में रही।
छोटे बच्चों को तेज आवाज से बचाने की जरूरत है। तेज आवाज से कम उम्र में भी स्थायी और अपूरणीय श्रवण हानि हो सकती है। यातायात के अत्यधिक शोर का संबंध नींद में बाधा, सुनने की क्षमता और हृदय संबंधी समस्याओं से है। - डॉ. कपिल सिक्का, ईएनटी, एम्स
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