दिल्ली में कागजों पर ही सख्त ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ नियम, बिना जांच धड़ल्ले से जारी हो रहे फर्जी सर्टिफिकेट
दिल्ली में वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए लागू पीयूसीसी नियम प्रभावी नहीं हो पा रहा है। पेट्रोल पंपों पर ...और पढ़ें

बहादुरशाह जफर मार्ग स्थित पेट्रोल पंप पीयूसी कराते वाहन चालक। जागरण

समय कम है?
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संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। टैक्सी चलाने वाले 40 वर्षीय आकाश सोमवार को वजीर पुर स्थित एक पेट्रोल पंप पर बने प्रदूषण जांच केंद्र पर पहुंचे। कार से बीच- बीच में धुआं निकलता है।
उन्होंने यह बात प्रदूषण जांच करने वाले को बताई तो उसने कहा कि शुल्क थोड़ा ज्यादा लगेगा, कार का इंजन बंद कर जांच कर देगा। आकाश ने उसे 130 रुपये की जगह 200 का नोट थमाया और कुछ ही मिनटों में अपना पीयूसीसी लेकर चलता बना।
इस तरह का नजारा दिल्ली के ज्यादातर प्रदूषण जांच केंद्रों पर अक्सर देखने को मिल जाता है। इसका सीधा अभिप्राय यह कि वैध पीयूसीसी होने पर भी यह कतई नहीं कि वाहन प्रदूषण रहित हो।
PUCC के लिए नहीं किया जाता इनकार
अमूमन किसी वाहन को पीयूसीसी के लिए इनकार किया ही नहीं जाता। नतीजा वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए लागू होने वाला पीयूसीसी की अनिवार्यता का नियम स्वत: ही बेमानी हो जाता है।
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विडंबना यह भी कि दिसंबर के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शहर की वायु गुणवत्त्ता बहुत ज्यादा खराब हो जाने पर बिना पीयूसीसी ईंधन नहीं का नियम लागू किया तो कुछ दिन धड़ाधड़ पीयूसीसी बने।
इससे उत्साहित होकर मंत्री ने यह नियम साल भर के लिए लागू करने की घोषणा कर दी। लेकिन कुछ ही दिन बाद स्थिति पूर्ववत होने लगी। अब ज्यादातर पंपों पर बिना पीयूसीसी जांच के ही ईंधन दिया जा रहा है।
पीयूसीसी नियम के सफल न होने के मुख्य कारण
- पेट्रोल पंप पर हर गाड़ी की जांच के लिए पर्याप्त स्टाफ और तकनीक की कमी, जिससे लंबी लाइनें लगने का डर।
- कई पीयूसी केंद्र बिना जांच के ही सर्टिफिकेट जारी कर रहे थे, जिसके बाद 28 केंद्र निलंबित भी किए गए।
- दिल्ली में 10-15 साल से अधिक पुराने वाहनों की संख्या काफी है, जो तकनीकी रूप से प्रदूषण कम करने में सक्षम नहीं हैं।
- पीयूसी केंद्र के सिस्टम पुराने हैं और पेट्रोल पंप के साथ रियल-टाइम डेटा लिंकेज (एएनपीआर कैमरे) की कमी।
80 लाख वाहन, पीयूसीसी 50 लाख के पास भी नहीं
दिल्ली में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या लगभग 80 लाख है। 2025 में 16 दिसंबर तक 45 लाख 46 हजार 61 पीयूसीसी ही जारी हुए थे। 2024 में 49 लाख 32 हजार 973 पीयूसीसी प्रमाण पत्र जारी हुए थे।
इससे पहले 2023 में यह संख्या 52 लाख 30 हजार 292 जबकि 2022 में 54 लाख 73 हजार 13 पीयूसी प्रमाण पत्र जारी हुए थे।
एक अक्टूबर से 11 दिसंबर 2024 के बीच 2.80 लाख से अधिक चालान काटे गए, जिनकी कुल राशि 280 करोड़ रुपये से अधिक है। 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' अभियान के तहत 17-18 दिसंबर 2025 के शुरुआती दिनों में भी 3,700 से अधिक वाहनों का चालान हुआ।
इसमें कोई संदेह नहीं कि दिल्ली में पीयूसीसी केवल एक आइ वाश की तरह है। कहीं न कहीं सरकार भी यह मान रही है, इसीलिए इसमें पूर्ण बदलाव पर विचार जारी है। मेरा मानना है कि पीयूसीसी जारी करना आनलाइन होना चाहिए। गाड़ी में भी कुछ सेंसर लगे हों जो प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर ब्लिंक करने लगें। इस सूरत में गाड़ी निर्माता कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर में भेज दी जाए ताकि उसकी खामी ठीक हो सके।
सुनील दहिया, संस्थापक एवं मुख्य विश्लेषक, एन्वायरोकैटेलिस्ट
पीयूसी सिस्टम में व्यापक स्तर पर सुधार किए जाएं ताकि सड़कों पर वही गाड़ियां चलें, जो पूरी तरह फिट हों। पीयूसी सिस्टम को रिमोट सेंसिंग टेक्नालाजी व इमिशन मानिटर से जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही अधिक प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की सड़कों पर पहचान जरूरी है। निस्संदेह इस प्रक्रिया में वाहन निर्माता कंपनियों पर भी जोड़ा जाना चाहिए ताकि वाे उस गाड़ी की प्रदूषण संबंधी खामियां दूर करे।
