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कोर्ट में पेशी का तरीका बदलेगा, दिल्ली की 16 जेलों में लगेगा AI सिस्टम; हर महीने बचेंगे 15 करोड़ रुपये

Published: Wed, 21 Oct 2026 05:56 PM (IST)Updated: Wed, 21 Oct 2026 05:59 PM (IST)

दिल्ली की जेलों में कैदियों की अदालत में पेशी के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली लागू की जा रही है। इससे ...और पढ़ें

जेलों से कोर्ट में पेशी का तरीका बदलेगा। फोटो: आर्काइव

जेलों से कोर्ट में पेशी का तरीका बदलेगा। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. 16 दिल्ली जेलों में 840 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम लगेंगे।

  2. दिल्ली पुलिस को हर महीने 15 करोड़ रुपये की बचत होगी।

  3. कैदियों की सुरक्षा जोखिम घटेंगे, जेल सुविधाएं सुधरेंगी।

गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली की जेलों से कैदियों को अदालत में पेशी के लिए ले जाने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली की 16 जेलों में 840 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम लगाए जाएंगे।

करीब 38 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस व्यवस्था के तहत कैदी जेल में रहते हुए ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हो सकेंगे। इससे दिल्ली पुलिस को हर महीने होने वाले करीब 15 करोड़ रुपये के भुगतान की बचत होगी।

जेलों में जरूरत के अनुसार सिस्टम लगाए जाएंगे। व्यवस्था लागू होने के बाद कैदियों को पेशी के लिए जेल से बाहर ले जाने की जरूरत काफी कम हो सकती है।

बचत की रकम से सुधरेंगी जेल की सुविधाएं

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था से होने वाली बचत का इस्तेमाल जेलों में जरूरी सुविधाएं बेहतर बनाने और कैदियों के कल्याण पर किया जा सकेगा। जेलों में संचालित फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण, मशीनों में सुधार और कामकाज की सुविधाएं बढ़ाने के लिए अधिक फंड उपलब्ध हो सकेगा।

इससे कैदियों को हुनर सीखने और काम के बेहतर अवसर मिलेंगे। स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियों पर भी अधिक संसाधन खर्च किए जा सकेंगे।

सुरक्षा के साथ संसाधनों की भी बचत

फिलहाल कैदियों को अदालत तक पहुंचाने, उनकी सुरक्षा और पेशी के बाद जेल वापस लाने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन संभालती है। इसके लिए जेल वैन और पुलिसकर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है।

कैदियों की संख्या और उनकी सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता के अनुसार अतिरिक्त बल भी लगाना होता है। इस काम में जरुरत के हिसाब से कभी 500 या कभी इससे अधिक कर्मियों की डयूटी लगाई जाती है।

यह कैदी के प्रोफाइल पर निर्भर करता है कि किसकी पेशी के दौरान कितने पुलिसकर्मी की डयूटी होगी। रोजाना करीब 2000 कैदियों की पेशी कोर्ट में होती है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का दायरा बढ़ने से पुलिसकर्मियों की ड्यूटी का बोझ कम हो सकता है।

जेल वैन की आवाजाही घटने से ईंधन पर खर्च बचेगा। साथ ही प्रदूषण और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।

जेल से बाहर ले जाने के जोखिम होंगे कम 

कैदियों को जेल से अदालत तक ले जाने के दौरान सुरक्षा संबंधी कई चुनौतियां रहती हैं। रास्ते में जाम से पेशी में देरी हो सकती है। वैन और अदालत परिसर में कैदियों की सुरक्षा के लिए भी सतर्कता बरतनी पड़ती है।

इस दौरान कैदियों के भागने, हमले या प्रतिबंधित सामान की आवाजाही जैसी आशंकाएं बनी रहती हैं। नई व्यवस्था से इन जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि, जिन मामलों में कैदी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश करना जरूरी होगा, वहां मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था के तहत ही इंतजाम किए जाएंगे।

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