दिल्ली में प्रदूषण शुल्क का अजीब हिसाब, कुल ₹1935 करोड़ में 1154 अब भी बचे; खर्च का 98% RRTS पर
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए व्यावसायिक वाहनों से वसूले गए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) का बड़ा हिस्सा खर्च ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली में 1154 करोड़ रुपये का प्रदूषण शुल्क अप्रयुक्त।
कुल खर्च का 98% रैपिड रेल परियोजना पर लगा।
आरटीआई ने ईसीसी फंड के उपयोग पर सवाल उठाए।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण कम करने के नाम पर व्यावसायिक वाहनों से वसूले जा रहे पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) के इस्तेमाल का अजीबोगरीब हिसाब सामने आया है।
दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग को मिले 1935.44 करोड़ रुपये में से 781.51 करोड़ रुपये ही खर्च हुए, जबकि 1153.93 करोड़ रुपये अब भी शेष हैं। यानी प्रदूषण शुल्क के इस फंड में बची रकम अब तक किए गए कुल खर्च से करीब 372 करोड़ रुपये अधिक है।
सामाजिक कार्यकर्ता अमित गुप्ता की आरटीआइ के जवाब में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, एमसीडी ने छह नवंबर 2015 से 10 अप्रैल 2026 तक कुल 2247.66 करोड़ रुपये ईसीसी के रूप में वसूले। यह राशि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में टोल प्लाजा के जरिये वसूलकर दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग में जमा कराई गई।
खर्च का बड़ा हिस्सा रैपिड रेल में
781.51 करोड़ रुपये के कुल खर्च में से 765 करोड़ रुपये अकेले दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस परियोजना के लिए दिए गए। इसमें 12 मार्च 2019 को 265 करोड़ और तीन मई 2023 को 500 करोड़ रुपये एनसीआरटीसी/एनसीआरटीसीएल को दिए गए। दोनों भुगतान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संदर्भ में हुए।
इसका मतलब है कि अब तक खर्च किए गए ईसीसी फंड का करीब 98 प्रतिशत हिस्सा आरआरटीएस में गया। बाकी रकम एचसीएनजी परियोजना, आरएफआइडी सिस्टम और नान-मोटराइज्ड व्हीकल लेन से जुड़े कार्यों में खर्च हुई।
प्रदूषण शुल्क का पैसा, इस्तेमाल कितना प्रदूषण पर
ईसीसी की शुरुआत छह नवंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में हुई थी। इसका उद्देश्य व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश को हतोत्साहित करने और प्रदूषण नियंत्रण में मदद करना था।
ऐसे में आरटीआइ से सामने आया खर्च का यह पैटर्न खासा महत्वपूर्ण है—1935 करोड़ रुपये विभाग को मिले, लेकिन करीब 1154 करोड़ रुपये अभी भी खर्च नहीं हुए हैं। वहीं, खर्च हुए 781.51 करोड़ में से 765 करोड़ रुपये आरआरटीएस को दिए गए। आरटीआइ दस्तावेज में इन भुगतानों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जोड़ा गया है।
एमसीडी ने खर्च की जिम्मेदारी परिवहन विभाग पर डाली
एमसीडी ने आरटीआइ के जवाब में साफ किया है कि टोल प्लाजा के जरिये ईसीसी वसूलना और उसे दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग में जमा कराना उसका काम है।
इस तरह 11 साल में 2247.66 करोड़ रुपये जुटाने के बावजूद 1153.93 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा अभी खर्च होना बाकी है, जबकि खर्च की गई राशि का लगभग पूरा बड़ा हिस्सा एक ही परियोजना में गया है। ईसीसी फंड के इस्तेमाल और बची राशि को प्रदूषण नियंत्रण के लिए खर्च करने की प्राथमिकता अब अहम मुद्दा बनती है।
