दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर बड़ा वार: अब एक फॉर्मूला नहीं, हॉटस्पॉट के हिसाब से बनेगी स्पेशल एक्शन प्लान
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब एक समान रणनीति के बजाय हॉटस्पॉट और उनके प्रमुख स्रोतों के आधार पर विशेष कार्ययोजनाएं बनाई जाएंगी।

दिल्ली-एनसीआर में अब हॉटस्पॉट के हिसाब से बनेगी खास रणनीति। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
प्रदूषण से निपटने को हॉटस्पॉट आधारित रणनीति बनेगी।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने विशेष एक्शन प्लान मांगे।
स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर सीधी कार्रवाई का निर्देश।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली सहित एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब एक जैसी कार्रवाई करने के बजाय हॉटस्पॉट और वहां मौजूद प्रदूषण के प्रमुख स्रोत के हिसाब से अलग- अलग रणनीति बनाई जाएगी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एनसीआर में शामिल सभी राज्यों और दिल्ली सरकार को चिन्हित हॉटस्पॉट के लिए विशेष एक्शन प्लान तैयार करने और उसे समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सीएक्यूएम के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोड़े ने इसे लेकर हाल ही में एक समीक्षा बैठक भी की। इसमें एनसीआर के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों ने हॉटस्पॉट की पहचान और उनके अपडेट, तैयार कार्ययोजनाओं तथा प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर किए जा रहे उपायों की जानकारी दी।
जहां जो स्रोत हावी, वहीं उसी पर फोकस
आयोग का जोर अब इस बात पर है कि किसी हॉटस्पॉट में प्रदूषण का कारण क्या है, पहले यह तय हो और फिर उसी स्रोत पर कार्रवाई की जाए। यानी सड़क की धूल वाले इलाके में धूल नियंत्रण, निर्माण गतिविधियों वाले क्षेत्र में निर्माण स्थलों की निगरानी और कचरा जलाने वाले इलाकों में खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे स्रोत-विशिष्ट उपाय किए जाएंगे।
सीएक्यूएम ने हॉटस्पॉट एक्शन प्लान को केवल तैयार करने तक सीमित नहीं रखने को कहा है। इन्हें समयबद्ध तरीके से लागू करने और नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे किसी क्षेत्र में उठाए गए कदमों के असर की समीक्षा कर जरूरत के मुताबिक रणनीति बदली जा सकेगी।
स्थानीय स्तर पर पकड़ मजबूत करने की तैयारी
आयोग के इस कदम का मकसद प्रदूषण नियंत्रण को ज्यादा स्थानीय और जवाबदेह बनाना है। अभी किसी बड़े क्षेत्र में प्रदूषण के लिए कई स्रोत जिम्मेदार हो सकते हैं, लेकिन सभी जगह एक जैसे उपाय कारगर नहीं होते। हॉटस्पॉट-आधारित योजना में संबंधित एजेंसियों को यह तय करना होगा कि किस इलाके में कौन-सा स्रोत प्रदूषण बढ़ा रहा है और उसे रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई।
सीएक्यूएम ने राज्यों, दिल्ली सरकार एवं प्रवर्तन एजेंसियों से हॉटस्पॉट की पहचान को अपडेट रखने तथा एक्शन प्लान के नियमित क्रियान्वयन और सख्त निगरानी पर विशेष जोर दिया है। साथ ही स्थानीय प्रदूषण के वास्तविक स्रोत पर भी सीधी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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