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'किसी को अवैध हिरासत में नहीं लिया', SC में बोली दिल्ली पुलिस; 10 अक्टूबर के सुरक्षा इंतजामों का दिया ब्योरा

Published: Thu, 15 Oct 2026 08:27 PM (IST)

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर 10 अक्टूबर को सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा दिया।

10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट की तस्वीर। फाइल फोटो

10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट की तस्वीर। फाइल फोटो

HighLights

  1. 10 अक्टूबर सुरक्षा इंतजामों का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट में दिया।

  2. किसी को अवैध हिरासत में नहीं लिया, पुलिस ने स्पष्ट किया।

  3. मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध, मेट्रो-ट्रैफिक डायवर्जन किए गए।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि बीते 10 अक्टूबर को अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए सुरक्षा के बाबत सभी आवश्यक कदम उठाए गए थे।

पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से दाखिल हलफनामे में संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा विवरण पेश किया गया। हलफनामे में कहा गया कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर और नई दिल्ली के अन्य क्षेत्रों में प्रस्तावित प्रदर्शनों के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की थी।

दिल्ली में कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान हैं और वीवीआईपी रूट, विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के दौरों और अन्य बड़े आयोजनों के चलते कड़ी सतर्कता बरतना जरूरी था। दिल्ली पुलिस ने डीएमआरसी को 9 अक्टूबर की रात नौ बजे से 10 अक्टूबर की शाम छह बजे तक 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने का प्रस्ताव भेजा था।

हलफनामे में क्या-क्या कहा?

इसके पीछे संवेदनशील इलाकों की ओर भीड़ के बढ़ने की आशंका और कानून-व्यवस्था में संभावित व्यवधान का हवाला दिया गया था। साथ ही मेट्रो ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी कम करने का भी अनुरोध किया गया था। इसके बाद, 10 अक्टूबर को रात 10 बजे से मेट्रो का संचालन सामान्य करने के लिए दिल्ली पुलिस ने डीएमआरसी को पत्र लिखा था।

हलफनामे में कहा गया है कि मेट्रो से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का निर्देश पहले ही लागू किया जा चुका है। 10 और 11 अक्टूबर को सुबह छह बजे से कई प्रमुख सड़कों और चौराहों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए गए थे।

जनता को पहले से यात्रा की योजना बनाने, गैर-जरूरी यात्रा से बचने और ट्रैफिक अपडेट्स देखते रहने की सलाह दी गई थी। यातायात प्रबंधन के लिए कुल 88 डायवर्जन फ्लेक्स साइनबोर्ड लगाए गए थे।

इंटरनेट सेवाओं को लेकर कही ये बात

पुलिस ने स्पष्ट किया कि इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया था। कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तय नियमों के अनुसार केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर ही प्रतिबंध लगाए गए थे, जिनकी स्थिति के आधार पर लगातार समीक्षा की जा रही थी।

हलफनामे में कहा गया है कि अदालत के निर्देशों के तहत किसी को भी अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया गया। वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका गया। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई की गई।

निर्धारित क्षेत्रों में धारा 163 से संबंधित नोटिस बोर्ड प्रदर्शित किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास लगाए गए नोटिस बोर्डों की भी समीक्षा की गई और आवश्यकतानुसार उन्हें हटा दिया गया। पुलिस ने बताया कि कानून-व्यवस्था और यातायात की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी उचित कदम उठाए जाएंगे।

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