दिल्ली पुलिस के अफसरों की बल्ले-बल्ले, 'ग्रुप-बी' में प्रमोट होंगे 10 हजार SI और इंस्पेक्टर; मिलेंगे कई लाभ
दिल्ली पुलिस के 10 हजार से अधिक इंस्पेक्टरों व सब-इंस्पेक्टरों को जल्द 'ग्रुप-बी' का दर्जा मिल सकता है। पुलिस मुख्यालय ...और पढ़ें

दिल्ली पुलिस के अफसर होंगे प्रमोट। फोटो: आर्काइव
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के करीब 10 हजार से अधिक इंस्पेक्टरों व सब-इंस्पेक्टरों को जल्द बड़ी सौगात मिल सकती है। लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने इन्हें ग्रुप-सी से प्रमोट कर 'ग्रुप-बी' नान-गजेटेड श्रेणी में करने का प्रस्ताव दिल्ली सरकार के गृह विभाग के उप सचिव पास भेज दिया है।
इस कदम से न केवल पुलिस महकमे के प्रशासनिक ढांचे में सुधार होगा, बल्कि अधिकारियों का मनोबल भी बढ़ेगा। कई साल पहले भी यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था लेकिन कुछ कारणों से उसे अमल नहीं किया गया।
अब पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के निर्देश पर यह प्रस्ताव दोबारा से सुधार करके सरकार के पास भेजा गया है, जिस पर सरकार को मंजूरी देना है। लंबे समय से उप-राज्यपाल, दिल्ली सरकार व दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के बीच इसको लेकर चर्चा चल रही थी।
10 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को मिलेगा लाभ
22 अक्टूबर को मुख्यालय से भेजे गए इस प्रस्ताव को लेकर पुलिस अधिकारी का कहना है कि इस नए वर्गीकरण से वेतन को लेकर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं बढ़ेगा।
'ग्रुप-बी' का दर्जा मिलने पर दिल्ली पुलिस में अधिकारियों पर मौजूदा प्रशासनिक नियंत्रण पहले जैसा ही रहेगा। पदों के अपग्रेडेशन के लिए अलग से कानूनी बदलाव की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह केंद्रीय सिविल सेवा वर्गीकरण के अनुकूल ही है।
प्रशासनिक और कानूनी आशंकाएं हुईं दूर
दरअसल, बीते एक जनवरी को दिल्ली सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। उस समय दिल्ली सरकार ने आशंका जताई थी कि पदों का दर्जा 'ग्रुप-बी' होने से अनुशासनात्मक प्राधिकारी बदल सकते हैं और प्रशासनिक जटिलता पैदा हो सकती है।
इसी वजह से प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए पुलिस मुख्यालय को वापस भेज दिया गया था। अब दिल्ली पुलिस ने कानूनी और वित्तीय विशेषज्ञों की राय के साथ सभी संशयों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
पुलिस आयुक्त के कानूनी व वित्तीय सलाहकार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इंस्पेक्टरों और सब-इंस्पेक्टरों के पदों को ग्रुप-बी में वर्गीकृत करने से दिल्ली पुलिस की अनुशासनात्मक व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भर्ती नियमों में बिना किसी जटिलता के इसे लागू किया जा सकता है। सभी प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों को दूर करते हुए दिल्ली पुलिस ने गृह विभाग से अनुरोध किया है कि इन भर्ती नियमों को जल्द मंजूरी दी जाए।
इसे केंद्रीय राजपत्र में अधिसूचित किया जाए ताकि यह व्यवस्था आधिकारिक रूप से लागू हो सके।
ग्रुप-बी बनने पर मिलेंगे कई सेवा लाभ
ग्रुप सी से ग्रुप बी में अपग्रेड होने पर पुलिसकर्मियों के सेवा नियमों में कई सुधार और लाभ मिलते हैं। ग्रुप 'बी' में शामिल होने पर भविष्य में वेतनमान और पे-मैट्रिक्स में सुधार के नए रास्ते खुलते हैं।
आधिकारिक दौरों, ट्रेनिंग या ट्रांसफर के दौरान मिलने वाला यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता और होटल व आवास का क्लेम ग्रुप सी के मुकाबले उच्च श्रेणी में होता है।
केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार कई भत्ते (जैसे चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस या मेडिकल रीइम्बर्समेंट की प्रोसेसिंग) प्रशासनिक स्तर पर अधिक प्राथमिकता और आसान दरों पर स्वीकृत होते हैं।
समयबद्ध वित्तीय पदोन्नति का स्तर बढ़ता है, जिससे सेवा के दौरान बिना पदोन्नति के भी उच्च पे-लेवल का लाभ मिलता है। ग्रुप 'बी' का कैडर होने से आगे चलकर ग्रुप 'ए' के पद पर प्रोन्नति की प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित हो जाती है।
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