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दिल्ली में चीनी नागारिक समेत 7 लोग गिरफ्तार, 'डिजिटल अरेस्ट' कर ठगी करने वाला अंतरराष्ट्रीय गिरोह बेनकाब

By Mohammad SaqibEdited By: Kushagra Mishra
Published: Sat, 10 Jan 2026 04:15 PM (IST)

आईएफएसओ यूनिट की स्पेशल सेल ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लोगों को डराने और ठगने वाले एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. अंतरराष्ट्रीय 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश।

  2. यूपी एटीएस अधिकारी बनकर लोगों को डराते थे।

  3. सैकड़ों पीड़ितों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आईएफएसओ यूनिट की स्पेशल सेल ने हाल के वर्षों के सबसे खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह खुद को यूपी एटीएस का अधिकारी बताकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” कर ठगता था। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े एक चीनी नागरिक समेत कुल सात साइबर जालसाजों को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि बीते साल सितंबर से चीनी, ताइवानी, पाकिस्तानी और नेपाली अपराधियों से जुड़ा यह ‘सिम्बाक्स सिंडिकेट’ अत्याधुनिक टेलीकॉम तकनीक का इस्तेमाल कर भारत में कॉल करता था। गिरोह के सदस्य पीड़ितों को फोन कर खुद को यूपी एटीएस अधिकारी बताते थे और उन पर पहलगाम और दिल्ली विस्फोट जैसे आतंकी हमलों में शामिल होने का झूठा आरोपलगाते थे।

इसके बाद उन्हें तुरंत गिरफ्तारी की धमकी दी जाती और तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” दिखाकर वीडियो कॉल और निगरानी के जरिए मानसिक दबाव बनाया जाता। घबराए पीड़ितों से कहा जाता कि वे खुद को बचाने के लिए तय खातों में तुरंत पैसा ट्रांसफर करें।

सैकड़ों लोग शिकार, 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी

पुलिस के मुताबिक यह गिरोह अब तक सैकड़ों लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर चुका है और उनसे 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। कई पीड़ितों ने डर के कारण शिकायत तक नहीं की थी।

भारी मात्रा में उपकरण बरामद

आईएफएसओ यूनिट ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में हाईटेक उपकरण बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • 22 सिम बॉक्स
  • 8 मोबाइल फोन
  • 3 लैपटॉप
  • 7 सीसीटीवी कैमरे
  • 5 राउटर
  • 3 पासपोर्ट
  • 10 भारतीय सिम कार्ड
  • 120 चीनी विदेशी सिम कार्ड

इन उपकरणों के जरिए यह गिरोह विदेशों से बैठकर भारत में फर्जी कॉल करता था और अपनी पहचान छिपाए रखता था। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क व पैसों के लेन-देन के रास्तों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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