YouTube पर वीडियो देखकर सीखी नकली नोटों की छपाई, किराये के कमरे में छापी 500 और 100 की गड्डी
पश्चिमी दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स स्क्वाड ने ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया, जो इंटरनेट पर वीडियो देखकर नकली नोट ...और पढ़ें

पुलिस गिरफ्त में जनकपुरी में किराये के कमरे में नकली नोट बना लोग और बरामद नकली नोट और बनाने की सामग्री। पुलिस
HighLights
पश्चिमी दिल्ली में नकली नोट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़।
इंटरनेट वीडियो देखकर सीखी 500 और 100 के नोट बनाने की तकनीक।
पुलिस ने चार आरोपी गिरफ्तार किए, 18 लाख के नकली नोट बरामद।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। पश्चिमी जिला पुलिस की एंटी नारकोटिक्स स्क्वाड ने ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो इंटरनेट पर वीडियो और ट्यूटोरियल देखकर नकली नोट तैयार करने और उनकी प्रोसेसिंग की तकनीक सीखी थी। इसके बाद बलजीत नगर में किराये का कमरा लेकर वहीं 500 और 100 रुपये के नकली नोट तैयार करने लगे। पुलिस ने गिरोह के चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
कब्जे से 18 लाख 23 हजार 800 रुपये के नकली नोट बरामद
आरोपितों के कब्जे से 18 लाख 23 हजार 800 रुपये अंकित मूल्य के नकली नोट बरामद किए गए हैं। इनमें तैयार और अर्धनिर्मित नोट शामिल हैं। पुलिस ने नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल लैपटाॅप, हार्ड डिस्क, कलर प्रिंटर, स्क्रीन प्रिंटिंग फ्रेम, वाटरमार्क डाई, सिक्योरिटी थ्रेड, हीट लेमिनेटिंग मशीन, कटर और अन्य सामग्री भी बरामद की है।
आरोपित की उग्र है मात्र 25 साल
पुलिस उपायुक्त हरेश्वर वी स्वामी ने बताया कि एक अक्टूबर को हेड कांस्टेबर प्रवीण और विनोद जनकपुरी सी2 ब्लाॅक में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों ने उन्हें देखकर भागने की कोशिश के दौरान अंकित कुमार (25) को पकड़ा था। तलाशी में उसके पास 500 रुपये के 250 नकली नोट मिले, जिनका अंकित मूल्य 1.25 लाख रुपये था।
अंकित की निशानदेही पर दो और दबोचे
एफएसएल विशेषज्ञ ने मौके पर ही नोटों की जांच कर उन्हें नकली बताया। इस संबंध में जनकपुरी थाने में प्राथमिकी दर्ज कर अंकित की निशानदेही पर उसे नोट उपलब्ध कराने वाले पटेल नगर निवासी गगनदीप (31) और कुलवंत (44) को दो अक्टूबर को को बलजीत नगर से गिरफ्तार कर लिया।
उनके किराये के कमरे की तलाशी लेने पर वहां से 16 लाख 98 हजार 800 रुपये अंकित मूल्य के तैयार और अर्धनिर्मित नकली नोट मिले।
पुलिस के अनुसार, अमित (34) ने जुलाई में यह कमरा तीन हजार रुपये प्रतिमाह पर गगनदीप और कुलवंत को किराये पर दिया था। जांच में सामने आया कि उसे कमरे में चल रही गतिविधियों की जानकारी थी और बाद में वह भी नकली नोट तैयार करने में शामिल हो गया।
प्रिंटिंग व डाई-कटिंग मशीनों का अनुभव
पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। पता चला वह गत तीन महीने से यह काम कर रहे थे। गगनदीप ने अपने मामा की प्रिंटिंग प्रेस में काम किया था और उसे प्रिंटिंग व डाई-कटिंग मशीनों का अनुभव था।
कुलवंत को ग्राफिक डिजाइनिंग और फोटोशाॅप की जानकारी थी। दोनों ने अपने हुनर को मिलाकर नकली नोट तैयार करने की व्यवस्था बनाई। इसके बाद इंटरनेट पर वीडियो और ट्यूटोरियल देखकर नोटों की छपाई और प्रोसेसिंग की तकनीक सीखी।
पहले भी हो चुका है गिरफ्तार
जांच में सामने आया कि गगनदीप ऑनलाइन गेमिंग में नुकसान के बाद इस धंधे से जुड़ा। कुलवंत पहले मोबाइल फोन की दुकान चलाता था और सिम कार्ड डीलर के तौर पर भी काम कर चुका है। 2012 में फर्जी दस्तावेजों से सिम कार्ड जारी करने के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था।
अंकित 12वीं पास है और पार्किंग अटेंडेंट का काम करता था। उसने गगनदीप से करीब 2.50 लाख रुपये अंकित मूल्य के 500 रुपये के नकली नोट 50 हजार रुपये में खरीदे थे। पुलिस अब गिरोह के स्रोत से लेकर नोट प्राप्त करने वालों तक की पूरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है।
