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बैंक अधिकारी बनकर 22.56 लाख रुपये की ठगी, दो आरोपित गिरफ्तार; ढाई करोड़ की संपत्ति बरामद

Published: Thu, 29 Oct 2026 01:58 PM (IST)

दिल्ली पुलिस ने कंपनी निदेशक बनकर बैंक से 22.56 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। ...और पढ़ें

पुलिस टीम ने गाजियाबाद के लोनी से दोनों को गिरफ्तार किया। प्रतीकात्मक तस्वीर

पुलिस टीम ने गाजियाबाद के लोनी से दोनों को गिरफ्तार किया। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. बैंक से 22.56 लाख रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश।

  2. दो आरोपित गिरफ्तार, 2.50 करोड़ की संपत्ति बरामद।

  3. फर्जी ईमेल और सोशल इंजीनियरिंग से करते थे ठगी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बैंक अधिकारियों को कंपनी का निदेशक बनकर फोन करने और फर्जी ईमेल के जरिये 22.56 लाख रुपये ट्रांसफर कराने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है।

सेंट्रल जिला पुलिस ने मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने वर्तमान और इससे जुड़े अन्य मामलों की जांच के दौरान करीब 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की है। इसमें सोने के सिक्के, चेन, कड़े, अंगूठियां, नकदी और महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी शामिल हैं।

एक आरोपित सात साल से था फरार

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान गाजियाबाद के लोनी निवासी विनय कुमार यादव (36) और नोएडा निवासी अनिल कुमार सहगल (65) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपितों के खिलाफ पहले भी वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज हैं। विनय कुमार यादव एक अन्य मामले में घोषित अपराधी है और सात वर्ष से अधिक समय से फरार चल रहा था।

कंपनी के निदेशक की पहचान का किया इस्तेमाल

पुलिस के अनुसार, मामला बैंक ऑफ इंडिया की राजेंद्र प्लेस शाखा के प्रबंधक की शिकायत पर दर्ज किया गया था। पांच अगस्त 2026 को बैंक अधिकारी को एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को दीपक मल्होत्रा बताया। वह कई कंपनियों से जुड़े निदेशक के रूप में बैंक अधिकारियों से बातचीत कर रहा था।

बोला- कंपनी की चेकबुक खत्म हो गई

आरोपित ने पहले एक करोड़ रुपये की सावधि जमा रसीद (एफडीआर) बनवाने की बात की और फिर दूसरी बैंकों में अधिक ब्याज मिलने का हवाला देकर ब्याज दरों पर चर्चा की। इससे बैंक अधिकारियों का भरोसा जीतने के बाद उसने कंपनी के खाते से भुगतान करने की बात कही। उसने दावा किया कि कंपनी की चेकबुक खत्म हो गई है, इसलिए भुगतान ईमेल के जरिये किया जाए।

आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर की

इसके बाद कंपनी के पंजीकृत ईमेल पते से मिलता-जुलता फर्जी ईमेल आईडी इस्तेमाल कर कंपनी के लेटरहेड पर भुगतान संबंधी निर्देश भेजे गए। इसमें कंपनी के खाते से 22,56,922 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करने को कहा गया।

बैंक अधिकारियों ने जब जरूरी क्षतिपूर्ति दस्तावेज मांगे तो फोन करने वाले ने जल्द भुगतान करने का दबाव बनाया। पुलिस के अनुसार, इन निर्देशों पर बैंक से आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर दी गई। इस मामले में साइबर थाना, सेंट्रल जिला में पांच अगस्त 2026 को ई-एफआईआर दर्ज की गई थी।

पश्चिम बंगाल के खाते में पहुंची रकम

जांच में पता चला कि ठगी की रकम पश्चिम बंगाल में बंधन बैंक के एक खाते में भेजी गई थी। पुलिस के मुताबिक, फोन नंबर और ईमेल से जुड़े तकनीकी सुरागों की मदद से आरोपितों की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस टीम ने गाजियाबाद के लोनी से दोनों को गिरफ्तार किया।

ठगी की रकम से खरीदते थे सोना

जांच में पश्चिम बंगाल और बिहार में सक्रिय अन्य सहयोगियों के बारे में भी जानकारी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि गिरोह फर्जी कंपनी लेटरहेड, मिलती-जुलती ईमेल आईडी और सामाजिक अभियांत्रिकी (सोशल इंजीनियरिंग) का इस्तेमाल कर बैंक अधिकारियों को निशाना बनाता था। रकम खाते में पहुंचने के बाद उसे दूसरे माध्यमों से निकालकर सोना और अन्य संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया जाता था।

सोने के सिक्के, जेवरण और थार रॉक्स बरामद

पुलिस के अनुसार, बरामद संपत्ति की कुल कीमत करीब 2.50 करोड़ रुपये है। बरामद सामान में अलग-अलग वजन के 101 सोने के सिक्के, 17 सोने की चेन, नौ सोने के कड़े व ब्रेसलेट, तीन हार, तीन अंगूठियां, छह बालियां, एक नथ, एक मांगटीका, 2.37 लाख रुपये नकद, तीन मोबाइल फोन और अगस्त 2026 में खरीदी गई महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी शामिल हैं। बरामद संपत्ति का मौजूदा और अन्य मामलों से संबंध स्थापित करने के लिए जांच की जा रही है।

छह अन्य मामलों का भी खुलासा

पुलिस के मुताबिक, आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद इसी तरह बैंक अधिकारियों को धोखे में रखकर खातों से रकम ट्रांसफर कराने से जुड़े छह अन्य मामलों का भी पता चला है। इनमें गुरुग्राम, पलवल, दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी और रोहिणी जिलों के साइबर थानों में दर्ज मामले शामिल हैं। इन मामलों में ठगी या ठगी के प्रयास की रकम लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक बताई गई है।

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