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MCD को 8 सालों में 1500 करोड़ का राजस्व घाटा, चुनावी दबाव के बीच यूजर चार्ज लागू करना बनी बड़ी चुनौती

Published: Fri, 23 Oct 2026 09:09 PM (IST)

एमसीडी 2017 के ठोस कचरा प्रबंधन उप नियमों को लागू नहीं कर पाई। जिसकी वजह से उसे 1500 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

दिल्ली एमसीडी ऑफिस, सोशल मीडिया।

दिल्ली एमसीडी ऑफिस, सोशल मीडिया।

HighLights

  1. एमसीडी 2017 के कचरा प्रबंधन नियम लागू नहीं कर पाई।

  2. नियम लागू न होने से 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

  3. नए 2026 नियम लागू करना एमसीडी के लिए चुनौती।

निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 2017 में आए ठोस कचरा प्रबंधन उप नियमों को एमसीडी लागू नहीं कर पाई है और अब 2026 के उप नियमों को प्रस्तावित कर दिया है।

इन नियमों को लागू कराना एमसीडी अगामी चुनावी वर्ष के बीच चुनौती से कम नहीं होगा। जबकि दिल्ली और निगम की सरकार में आने के बाद लागू हुए इस शुल्क को 2025 में इसे एक माह में ही वापस लेना पड़ गया था।

MCD और नागरिकों के बीच संवाद जरूरी

अब चूंकि दिसंबर 2027 से जनवरी 2028 में आम चुनाव एमसीडी के होने हैं ऐसे में यह कैसे लागू होंगे इसके लिए एमसीडी को नागरिकों से संवाद करना होगा। अगर, 2017 के उप नियम 2018 जनवरी से अधिसूचित होने के बाद लागू हो जाते तो कम से 1500 करोड़ रुपये का एमसीडी को नुकसान नहीं होता।

इसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट में इस शुल्क को वसूलने का हलफनामा देने के बाद भी एमसीडी इसे वसूलना शुरू नहीं कर पाई है यह हाल तो तब भी है जब एमसीडी खराब आर्थिक स्थिति से जूझ रही है।

दिल्ली और केंद्र सरकार पर निर्भर एमसीडी

एमसीडी के पास 16 हजार करोड़ की देनदारी है फिर भी स्वच्छता के मामले में एमसीडी आत्मनिर्भर नहीं है। उसे अपने सफाई कर्मचारियों के वेतन से लेकर सफाई के लिए संसाधन जुटाने के लिए दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है।

जबकि विशेषज्ञों की मानें तो जब सरकार ने स्वयं ही यह शुल्क वसूलने का प्रविधान किया है तो एमसीडी द्वारा इसे वसूला न जाना स्वयं अधिकारियों की नाकामी है।

1500 करोड़ का नुकसान

एमसीडी की निर्माण समिति के चेयरमैन रहे जगदीश ममगांई कहते हैं कि एमसीडी के 13 लाख संपत्तिकर दाता है। सभी संपत्तियों से 100 रुपये ही लेते तो सालाना 156 करोड़ रुपये निगम को इससे राजस्व आता इससे केवल रिहायशी संपत्तियों से 1248 करोड़ रुपये राजस्व आता।

जबकि अगर व्यावसायिक संपत्तियों के शुल्क को भी जोड़े तो यह राशि आठ साल में 1500 करोड़ रुपये अधिक होती। ममगांई ने कहा कि 1500 करोड़ की राशि कम नहीं होती है। इससे काफी कुछ संसाधन जुटाए जा सकते हैं।

डेढ़ माह के अंदर ही वापस लेना पड़ा था आदेश

एमसीडी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अप्रैल 2025 से संपत्तिकर के साथ पोर्टल पर यूजर चार्ज वसूलना शुरू कर दिया था। इससे रिहायशी से लेकर व्यावसायिक संपत्तियों के मालिकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था।

इसके बाद डेढ़ माह के भीतर निगम को यह आदेश वापस लेना पड़ा था। अब कब और कैसे यह लागू होगा इसको लेकर एमसीडी ने फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं की है।

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