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'पिता नहीं बन पा रहा था दिल्‍ली का युवक...', जब डॉक्टरों ने की स्कैनिंग तो पेट में मिला यूट्रस

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:38 PM (IST)Updated: Fri, 11 Sep 2026 07:53 PM (IST)

Delhi Doctors Find Uterus In Man Stomach: दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित आरजी हॉस्पिटल्स में एक 26 वर्षीय युवक की ...और पढ़ें

निःसंतानता की जांच कराने पहुंचे दिल्ली के युवक के पेट में मिला गर्भाशय।   एआई इमेज

निःसंतानता की जांच कराने पहुंचे दिल्ली के युवक के पेट में मिला गर्भाशय। एआई इमेज

HighLights

  1. युवक की निःसंतानता जांच में पेट में गर्भाशय मिला।

  2. यह परसिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम का दुर्लभ मामला।

  3. दूरबीन विधि से सफल सर्जरी कर कैंसर का खतरा टाला।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजौरी गार्डन स्थित आरजी हॉस्पिटल्स में एक अत्यंत दुर्लभ चिकित्सीय मामला सामने आया है। निःसंतानता (इनफर्टिलिटी) का इलाज कराने पहुंचे 26 वर्षीय एक युवक के पेट में गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब जैसी महिला प्रजनन संरचनाएं पाई गईं।

निःसंतानता की जांच के दौरान खुलासा

मरीज पिता बनने की इच्छा पूरी न होने पर अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में जांच कराने पहुंचा था। शुरुआती जांच में पता चला कि उसके वीर्य में शुक्राणु पूरी तरह से गायब थे। इसके साथ ही शारीरिक जांच के दौरान दोनों अंडकोष (टेस्टीज) अंडकोश की थैली (स्क्रोटम) में नहीं पाए गए।

एमआरआई स्कैन और जेनेटिक जांच में युवक के क्रोमोसोम (सामान्य पुरुष पैटर्न) की पुष्टि हुई, लेकिन साथ ही उसके पेट में गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब जैसी संरचनाएं भी मिलीं। उसके दोनों अंडकोष पेट के अंदर ही मौजूद थे।

परसिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम की पहचान

डॉक्टरों ने इस बीमारी को परसिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम बताया। यह एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है, जिसमें भ्रूण के विकास के दौरान पुरुष शरीर में महिला प्रजनन संरचनाएं समाप्त होने के बजाय बनी रह जाती हैं। चिकित्सा इतिहास में दुनिया भर में इसके 300 से भी कम मामले दर्ज हैं।

दूरबीन विधि से सफल सर्जरी

अंडकोष लंबे समय तक पेट के अंदर रहने के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे, जिससे शुक्राणुओं का निर्माण नहीं हो पा रहा था। पेट में रहने के कारण उनमें कैंसर पनपने का भी अत्यधिक खतरा था।

आरजी हॉस्पिटल्स के चीफ यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुशील खरबंदा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने दूरबीन विधि (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) द्वारा गर्भाशय जैसी संरचना और क्षतिग्रस्त अंडकोषों को पेट से बाहर निकाल दिया। समय पर सर्जरी होने से मरीज में कैंसर का खतरा टल गया है और उसकी हालत स्थिर है।

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