दिल्ली लोक अदालत में 1.76 लाख मामलों का हुआ निपटारा, ट्रैफिक चालान से वसूले गए 2.77 करोड़
दिल्ली में रविवार को राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। जिसमें एक दिन में 1.76 लाख से अधिक मामलों का ...और पढ़ें
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दिल्ली लोक अदालत में 1.76 लाख मामलों का निपटारा, जागरण आर्काइव।
HighLights
1.76 लाख से अधिक मामलों का निपटारा, ₹600 करोड़ समझौता।
ट्रांसजेंडर, एसिड अटैक सर्वाइवर सहयोगी सदस्य के रूप में शामिल।
ट्रैफिक चालान, ऋण वसूली, एमएसीटी मामलों का समाधान।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में रविवार को आयोजित साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में एक ही दिन में करीब 600 करोड़ रुपये की समझौता राशि से 1.76 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया।
दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल 1,76,379 मामलों का निपटारा 599.71 करोड़ रुपये की समझौता राशि से किया गया।
केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही अदालत
इनमें 1.38 लाख मामले सिर्फ ट्रैफिक चालान के थे और इनके निपटारे से 2.77 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया। बड़ी संख्या में लोगों को चालान और अन्य लंबित विवादों को मौके पर ही निपटाने में मदद मिली। इस बार की लोक अदालत सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रही।
डीएसएलएसए ने एक अनूठी पहल करते हुए ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, एसिड अटैक सर्वाइवर और वरिष्ठ नागरिकों को लोक अदालत की पीठों में सहयोगी सदस्य के रूप में शामिल किया। इन्हें न्याय के साथी के रूप में जजों के साथ बैठाया गया।
जिला अदालतों में सबसे ज्यादा मामलों का निपटारा
लोक अदालत का आयोजन विभिन्न जिला अदालतों, दिल्ली हाई कोर्ट, ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी), उपभोक्ता आयोग और स्थायी लोक अदालतों में किया गया था। इसमें सबसे अधिक मामले जिला अदालतों में निपटे और यहां कुल 1.74 लाख मामलों का समाधान हुआ। इसमें 317.42 करोड़ रुपये की समझौता राशि तय हुई।
वहीं, समझौता राशि के लिहाज से सबसे बड़ा आंकड़ा डीआरटी से आया और ऋण वसूली न्यायाधिकरणों में सिर्फ 97 मामलों का निपटारा हुआ, लेकिन इनमें 252.83 करोड़ रुपये की राशि पर सहमति बनी।
दिल्ली हाई कोर्ट में 44 मामलों का निपटारा
दिल्ली हाई कोर्ट में 44 मामलों का निपटारा 10.87 करोड़ रुपये में हुआ, जबकि जिला उपभोक्ता आयोगों में 284 मामलों में 12.31 करोड़ रुपये और बिजली से जुड़ी स्थायी लोक अदालत में 1,502 मामलों में 6.27 करोड़ रुपये की समझौता राशि तय हुई।
इसके अलावा मोटर दुर्घटना दावा (एमएसीटी) के मामलों में भी बड़ी राहत मिली और रोहिणी कोर्ट में सारिका क्वात्रा बनाम न्यू त्रिशूल ट्रांसपोर्ट मामले का निपटारा 2.90 करोड़ रुपये के समझौते से हुआ।
इस दौरान डिजिटल लोक अदालत की भी व्यवस्था रही, जिसमें चालान का भुगतान होते ही जानकारी तुरंत ट्रैफिक पुलिस पोर्टल पर अपडेट हो गई और लोगों को एसएमएस से पुष्टि भेजी गई।
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