फ्रांस हिंसा पर दिल्ली के छात्रनेता बोले- इसे जायज नहीं कह सकते, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उपद्रव में फर्क जरूरी
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और लूटपाट पर दिल्ली के छात्र नेताओं ने चिंता जताई है। उन्होंने ...और पढ़ें

फ्रांस के पेरिस, मार्सिले, लिली और नीस समेत कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर दिल्ली के छात्र नेताओं ने जताई आपत्ति। सौ. एजेंसी
HighLights
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, लूटपाट की घटनाएं।
दिल्ली के छात्र नेताओं ने इसे अराजकता बताया।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उपद्रव में अंतर पर जोर।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। विरोध प्रदर्शन के नाम पर अगर दुकानों को लूटा जाए, सार्वजनिक संपत्ति को आग के हवाले किया जाए और आम लोगों की आजीविका को नुकसान पहुंचाया जाए, तो इसे महज छात्र प्रदर्शन कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फ्रांस के पेरिस, मार्सिले, लिली और नीस समेत कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं ने प्रदर्शन की प्रकृति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के छात्र नेताओं ने भी प्रदर्शन और अराजकता के बीच अंतर करने की जरूरत बताई है।
लूटपाट को जायज नहीं ठहराया जा सकता
फ्रांस के विभिन्न शहरों में प्रदर्शनों के दौरान दुकानों और बड़े शोरूम में लूटपाट, आगजनी तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन घटनाओं में शामिल सभी लोगों को छात्र प्रदर्शनकारी मान लिया जाए? किसी मुद्दे पर विरोध जताना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में हिंसा और लूटपाट को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाना गलत
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष यश डबास के अनुसार, लूटपाट और तोड़फोड़ को पूरे छात्र प्रदर्शन से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि फ्रांस में हिंसा में शामिल लोगों की पहचान और उनकी पृष्ठभूमि की आधिकारिक जांच होनी चाहिए। दूसरे देशों से आए शरणार्थियों की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों की भी तथ्यों के आधार पर जांच की जानी चाहिए।
देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना विरोध का तरीका नहीं
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आर्यमान ने भी प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा किसी भी देश में विरोध के नाम पर दुकानों, कारोबार और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी तत्व अशांति फैलाने के उद्देश्य से ऐसी गतिविधियों में शामिल हैं। शांतिपूर्ण विरोध और संगठित उपद्रव के बीच अंतर होता है। हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। प्रत्येक हिंसक करने वाली की पहचान कर कठोर सजा देनी चाहिए।
