विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दिल्ली के कूड़े के पहाड़ों से निकल रहा प्लास्टिक और लोहा, इनर्ट की आड़ में हो रहा अवैध कचरा डंपिंग

Published: Fri, 03 Apr 2026 03:45 AM (IST)

दिल्ली के ओखला, गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल से निकलने वाले इनर्ट में प्लास्टिक और अन्य कचरा मिलाया जा रहा है। ...और पढ़ें

दिल्ली के ओखला, गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल से निकलने वाले इनर्ट में प्लास्टिक और अन्य कचरा मिलाया जा रहा है। इमेज एआई

दिल्ली के ओखला, गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल से निकलने वाले इनर्ट में प्लास्टिक और अन्य कचरा मिलाया जा रहा है। इमेज एआई

मुहम्मद रईस, दक्षिणी दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कूड़े के तीन बड़े पहाड़ हैं-ओखला, गाजीपुर और भलस्वा। इन्हें समाप्त करने की मियाद तय हो चुकी है। पुराना कचरा निस्तारण की प्रोसेसिंग के बाद बनने वाले इनर्ट (निष्क्रिय मिट्टी) को इको पार्क से लेकर खाली पड़े मैदानों में डंप किया जा रहा है।

पर लक्ष्य पूरा करने की आपाधापी में अब प्लास्टिक कचरा फिल्टर किए बिना ही इनर्ट को खपाया जा रहा है। प्लास्टिक के साथ ही इसमें लोहा, स्टील समेत अन्य प्रकार का कचरा मिल रहा है। भलस्वा लैंडफिल साइट का ऐसा ही कचरा किराड़ी के शर्मा कालोनी के पास डीडीए की जमीन पर डंप किया गया।

काफी बड़े क्षेत्र में इस जमीन पर गड्ढा था, जिसमें गंदा पानी भरा था। जब प्लास्टिक कचरा युक्त इनर्ट इसमें डंप हुआ तो जलस्तर बढ़ गया और पास शर्मा कालोनी में घुटनों तक भर गया। लंबे समय तक लोगों ने समस्या झेली थी।

बदरपुर में लगभग 884 एकड़ में एनटीपीसी इको पार्क तैयार हो रहा है। इस लंबे-चौड़े क्षेत्र को समतल करने के लिए गड्ढ़ों को ओखला लैंडफिल साइट से निकलने वाले इनर्ट से भी समतल किया जा रहा है। पर इनर्ट की आड़ में यहां प्लास्टिक, लोहा, स्टील आदि मिला पुराना कचरा खप रहा है।

बृहस्पतिवार को दोपहर के समय राजीव, साहेब अली अंसारी व उनके दो और साथी इसी इनर्ट में चुंबक लेकर लोहा के कबाड़ खोजते मिले। सभी पास के मदनपुर खादर में ही रहते हैं। राजीव ने हाथ में कई घाव दिखाते हुए बताया कि स्टील का कचरा चुंबक में नहीं चिपकता। इसे हाथ से निकालना पड़ता है।

अक्सर धारदार स्टील से हाथ में घाव बन जाते हैं। इसके लिए हर सप्ताह टिटनेस का इंजेक्शन लगवाते हैं। साहेब अंसारी मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। घर में कोई नहीं है। अकेले जिंदगी कट रही है।

वे कहते हैं कि भीख मांगने या कोई गलत काम करने से तो ये अच्छा है। सुबह-शाम खोजने पर 10 से 12 किलो लोहा मिल ही जाता है। जंग लगा होने के चलते यह 12 रुपये किलो ही बिक पाता है। गुजारे के लिए यह पर्याप्त है।

सी एंड डी (निर्माण और विध्वंस) के कचरे के साथ ही बड़े पैमाने पर प्लास्टिक डंप हो रहा है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पुराने कचरे (लेगेसी वेस्ट) से प्लास्टिक समेत सभी प्रकार के ठोस कचरे को अलग करने पर ही इनर्ट को दूसरे स्थानों पर डंप करने का प्रावधान है।

इसमें प्लास्टिक कचरा मिला होने पर आगे चलकर यह चलकर संबंधित क्षेत्र में मृदा और भूजल प्रदूषण का कारण बनेगा। साथ ही इस पर पार्क विकसित करने की स्थिति में पौधों-वनस्पतियों को भी नुकसान होगा। प्रेस एवं सूचना निदेशक अनिल यादव से इस पर जवाब मांगा गया लेकिन कोई उत्तर नहीं आया।

यह भी पढ़ें: दिल्ली में वन्यजीवों की सुरक्षा को मिलेगी मजबूती, नौ नए इंस्पेक्टर होंगे तैनात