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दिल्ली के 9 गांवों में 13.26 एकड़ जमीन का होगा सर्वे, वेयरहाउस और फैक्ट्री परिसर बनाने की तैयारी

Published: Mon, 12 Oct 2026 12:07 PM (IST)

दिल्ली सरकार 9 गांवों में 13.26 एकड़ ग्राम सभा भूमि का स्थलाकृतिक सर्वेक्षण करा रही है। इस जमीन का उपयोग वेयरहाउस, फ्लैटेड फैक्ट्री परिसर और पौधारोपण के लिए किया जाएगा।

दिल्ली में इंडस्ट्रियल एरिया बढ़ाने के लिए होने वाले सर्वेक्षण के दायरे में दक्षिण-पश्चिम जिले के बदूसराय, गालिबपुर, झटिकरा, राघोपुर, रावता और धांसा गांव शामिल हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली में इंडस्ट्रियल एरिया बढ़ाने के लिए होने वाले सर्वेक्षण के दायरे में दक्षिण-पश्चिम जिले के बदूसराय, गालिबपुर, झटिकरा, राघोपुर, रावता और धांसा गांव शामिल हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. दिल्ली के 9 गांवों में 13.26 एकड़ जमीन का सर्वे।

  2. वेयरहाउस और फैक्ट्री परिसर बनाने की है तैयारी।

  3. डीएसआईआईडीसी को सौंपी गई है इस कार्य की जिम्मेदारी।

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और वेयरहाउस व फैक्ट्री परिसर विकसित करने की दिशा में सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत दक्षिण-पश्चिम और बाहरी उत्तर जिले के नौ गांवों में करीब 13.26 एकड़ ग्राम सभा की जमीन का स्थलाकृतिक सर्वेक्षण कराया जाएगा।

इन जमीनों पर क्या काम होगा?

दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) ने इसके लिए निविदा जारी की है। इस जमीन को दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग से लेकर डीएसआईआईडीसी को सौंपा जाना है। निविदा दस्तावेज के अनुसार, इनका उपयोग वेयरहाउस, फ्लैटेड फैक्ट्री परिसर और पौधारोपण के लिए किया जाना प्रस्तावित है।

दिल्ली के किन ग्रामों में होगी जमीन का सर्वे?

सर्वेक्षण के दायरे में दक्षिण-पश्चिम जिले के बदूसराय, गालिबपुर, झटिकरा, राघोपुर, रावता और धांसा गांव शामिल हैं। वहीं, बाहरी उत्तर जिले के औचंदी, निजामपुर रसूलपुर और ताजपुर कलां गांवों की जमीन का भी सर्वे किया जाएगा। इन नौ गांवों में कुल करीब 13.26 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इसमें दक्षिण-पश्चिम जिले की करीब 9.24 एकड़ और बाहरी उत्तर जिले की लगभग 4.02 एकड़ जमीन शामिल है।

जमीन की सीमा, पेड़ और सड़क तक का बनेगा नक्शा

डीएसआईआईडीसी की ओर से जारी निविदा में सर्वेक्षण के लिए 2,24,932 रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है। सर्वेक्षण के दौरान टोटल स्टेशन लेजर उपकरण की मदद से जमीन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।

इसमें भूखंडों की सीमाओं और क्षेत्रफल के साथ वहां मौजूद भवन, शेड, चारदीवारी, सड़क, पेड़, बिजली के खंभे, नालियों और पुलियों का विवरण दर्ज होगा। जमीन की ऊंचाई-नीचाई का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर स्तर मापे जाएंगे और उनके आधार पर नक्शे तैयार किए जाएंगे।

सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

चयनित एजेंसी को सर्वेक्षण के बाद ऑटोकैड पर तैयार नक्शे, रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज जमा कराने होंगे। प्रत्येक स्थल से संबंधित दस्तावेजों की पांच प्रतियां देनी होंगी। इसके लिए संबंधित विभागों से जरूरी प्रमाणन भी प्राप्त करना होगा। निविदा में भाग लेने वाली एजेंसियों के लिए समान प्रकार के स्थलाकृतिक सर्वेक्षण कार्य का अनुभव, जीएसटी पंजीकरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य है।

सर्वे के बाद क्या होगा?

सर्वेक्षण पूरा होने के बाद जमीन की सीमाओं और उपलब्ध क्षेत्रफल का स्पष्ट विवरण मिलने की उम्मीद है। इससे जमीन को उद्योग विभाग से डीएसआईआईडीसी को हस्तांतरित करने तथा प्रस्तावित औद्योगिक उपयोग के लिए आगे की प्रक्रिया में मदद मिलेगी।

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