दिल्ली में अवैध निर्माण बना मौत का पैगाम? सामने आई इस सच्चाई से खुली MCD अधिकारियों की कलई
राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण के दौरान इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पुलिस की सूचना ...और पढ़ें

एमसीडी अधिकारियों की लापरवाही से हो रहा अवैध निर्माण ( एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
अवैध निर्माण के दौरान इमारत गिरने से दो की मौत।
पुलिस की शिकायत पर भी एमसीडी ने नहीं की कार्रवाई।
एमसीडी ने आंतरिक जांच में अपनी लापरवाही स्वीकार की।
निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में किसी भी तरह के निजी निर्माण पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है। इसके बावजूद बिना नक्शा पास कराए हो रहे अवैध निर्माण के दौरान इमारत गिरने से दो लोगों की मौत ने व्यवस्था की कलई खोल दी है।
मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब एमसीडी को दिल्ली पुलिस ने 15 जून को ही शिकायत दी थी। इसके बाद एमसीडी ने निरीक्षण में यह कहकर मामले को रफा-दफा कर दिया कि मकान मालिक वहां मरम्मत करा रहा था।
आंखें मूंदे रहे एमसीडी के अधिकारी
इसके बाद न तो एमसीडी के किसी अधिकारी ने इस इमारत का निरीक्षण किया और न ही चार से पांच माह में तीन मंजिला अवैध इमारत खड़ी होने के बाद इसके निर्माण पर रोक लगाने की कोशिश की, बल्कि एमसीडी के इंजीनियर आंखें मूंदकर बैठे रहे। एमसीडी ने स्वयं अपनी आंतरिक जांच में इस बात को स्वीकार किया है।
एमसीडी की रिपोर्ट के अनुसार, निगम ने 28 अप्रैल 2026 को ही इमारत के मालिक को एक एडवाइजरी जारी की थी कि वह अपनी खस्ताहाल इमारत को ठीक करा लें। साथ ही किसी स्ट्रक्चरल इंजीनियर की देखरेख में मरम्मत का कार्य कराने के बाद उसका स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट जमा कराने को कहा था।
पुलिस को मिली थी अवैध निर्माण की सूचना
इसी बीच दिल्ली पुलिस ने 15 जून को संपत्ति में अवैध निर्माण की सूचना दी। इस शिकायत के बाद एमसीडी ने जब निरीक्षण किया तो संपत्ति मालिक इमारत की मरम्मत कराते हुए मिला। लेकिन, इसके बाद एमसीडी ने कोई निगरानी नहीं की और भवन मालिक ने बिना किसी मंजूरी के दूसरी और तीसरी मंजिल का अवैध निर्माण कर लिया।
चार से पांच माह तक चले इस निर्माण को न तो एमसीडी के किसी इंजीनियर ने देखा और न ही किसी अन्य कर्मचारी ने। हालांकि, एमसीडी की जांच में यह भी सामने आया है कि संपत्ति मालिक समीउल्लाह ने निगम को गुमराह करने की मंशा से इमारत के चार मंजिला होने का संपत्ति कर जमा किया था, ताकि वह अपने रिकॉर्ड से यह साबित कर सके कि उसका निर्माण पहले से मौजूद था और उसने कोई नया निर्माण नहीं कराया है।
बिना डीयूएसी की मंजूरी के नहीं हो सकता है निर्माण
दिल्ली में खासतौर पर पुरानी दिल्ली का इलाका, जिसे वाल्ड सिटी भी कहा जाता है, वहां इमारतें दशकों पुरानी हैं और कई की स्थिति खराब है। लेकिन, नए निर्माण की मंजूरी की प्रक्रिया काफी जटिल और शोषणकारी है।
इसी वजह से लोग यहां अवैध निर्माण कराते हैं। साथ ही पूरे इलाके में बिल्डर लॉबी सक्रिय है, जो तेजी से और बिना किसी रोक-टोक के निर्माण कराने की जिम्मेदारी लेती है।
यहां 70-80 प्रतिशत इमारतों में अवैध निर्माण से लेकर भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन का अनुमान है। जबकि यहां दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन (डीयूएसी) की पूर्व मंजूरी के बिना नक्शा पास ही नहीं हो सकता है।
अब घटना के बाद एमसीडी ने इलाके का व्यापक सर्वे करने और अवैध निर्माण को चिह्नित करने की बात कही है।
यह भी पढ़ें- ब्याज माफी योजना 2026: उत्तर प्रदेश में 10 लाख तक के बकाये पर पूरा ब्याज होगा माफ
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।