दिल्ली के 1723 PG भवनों का नहीं मिला मंजूर बिल्डिंग प्लान, हाई कोर्ट ने पूछा- बाकी दो-तिहाई का क्या?
दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन मामले में बड़ी संख्या में पीजी इमारतों के मंजूर बिल्डिंग प्लान न होने पर ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट। फाइल फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने बिना मंजूर प्लान वाले पीजी पर MCD को फटकारा।
2453 में से 1723 पीजी इमारतों के पास मंजूर प्लान नहीं।
किरण बेदी को सत्य निकेतन मामले में अदालत की मदद की अनुमति।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सत्य निकेतन मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ी संख्या में पीजी के मंजूर किए गए बिल्डिंग प्लान न मिलने पर गंभीर सवाल उठाते हुए नाराजगी व्यक्त की।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने रिकार्ड पर लिया कि कुल 2453 पीजी इमारतों में से 1723 पेइंग गेस्ट (पीजी) इमारतों को न तो मंजूर बिल्डिंग प्लान उपलब्ध है और न ही उनकी पुष्टि नहीं हो सकी।
पीठ ने टिप्पणी की कि कुल 2453 पीजी हैं और इसमें से एमसीडी के पास सिर्फ 730 के ही इमारतों का प्लान हैं, जोकि यह एक-तिहाई से भी कम है। पीठ ने पूछा कि बाकी दो-तिहाई इमारतों का क्या?
कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या अधिकारियों ने पीजी अकोमोडेशन के लिए मौजूदा रेगुलेटरी व्यवस्था की कमियों की जांच की है? अदालत ने एमसीडी से पूछा कि जिन इमारतों के प्लान मौजूद नहीं हैं, उनके विरुद्ध कानून के तहत कब कार्रवाई की जाएगी?
मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर के लिए तय करते हुए पीठ ने दिल्ली सरकार व एमसीडी को दिल्ली में पीजी अकोमोडेशन को रेगुलेट करने वाली कानूनी व्यवस्था के बारे में भी स्पष्ट जानकारी पेश करने को कहा। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि अगर इस बीच उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक होती है तो उसके मिनट्स अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
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वहीं, सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार व एमसीडी की तरफ से पेश हुए सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले में एमसीडी के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
यह भी बताया कि संबंधित इमारत मंजूरी या अनुमति की स्थिति, लागू बिल्डिंग बाय-लाज का पालन और संबंधित एमसीडी अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रेट से जांच के आदेश दिए हैं।
याचिकाकर्ता विधि छात्र अनिकेत कुमार गुप्ता ने याचिका दायर कर प्रभावित हुए छात्रों के स्वजन को मुआवजा देने के साथ ही एक स्वतंत्र न्यायिक जांच व पीजी-हास्टल के व्यापक ढ़ांचागत सुरक्षा आडिट कराने की भी मांग की गई है।
32 हजार कमरों में रह रहे हैं 50 हजार से अधिक लोग
एसजी ने अदालत को बताया कि एमसीडी ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 12 जोन में पीजी अकोमोडेशन का सर्वे पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि सर्वे के अनुसार 2453 पीजी इमारतों में करीब 32247 कमरे हैं और इनमें लगभग 50529 लोग रह रहे हैं।
अस्पष्ट जवाब पर डीयू को फटकार
सत्य निकेतन के मामले में डीयू के हलफनामा पर अदालत नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि जवाब बिल्कुल अस्पष्ट है। एक तरफ डीयू आंकड़ा देर रहा है और दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि कदम उठा रहे हैं। अदालत ने डीयू से पूछा कि उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामा में कहां हैं?
सत्य निकेतन मामले में किरण बेदी की अर्जी अदालत ने की स्वीकार
सत्य निकेतन में इमारत गिरने के मामले में अदालत की मदद करने के लिए पक्षकार बनाने की मांग संबंधी पूर्व आइपीएस व पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी की अर्जी को अदालत ने स्वीकार कर लिया है।
सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें किरण बेदी के अदालत की मदद करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस संबंध में कोई आदेश न दिया जाए। अदालत एसजी के तर्क को सुनने के बाद कहा कि अदालत किरण बेदी को अदालत में अपनी बात रखने की अनुमति देती है।
पीठ ने कहा कि हम पक्षों को यह भी निर्देश देते हैं कि इस मामले में कोई भी दस्तावेज या दलीलें दायर करते समय, उनकी एक प्रति किरण बेदी को भी दी जाए। उक्त निर्देश के साथ अदालत ने किरण बेदी की अर्जी का निस्तारण कर दिया।
