दिल्ली जिमखाना क्लब पर कब्जे और बेदखली की कार्रवाई को चुनौती, हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर पर कब्जे और बेदखली की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र ...और पढ़ें

दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर को कब्जे में लेने और उसके बाद खाली कराने का मामला इस समय तूल पकड़े हुए है। फाइल फोटो
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
जिमखाना क्लब पर कब्जे, बेदखली को चुनौती।
मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर को कब्जे में लेने और उसके बाद खाली कराने की कार्रवाई करने के खिलाफ क्लब सदस्यों की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, संपदा अधिकारी और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। मामले पर अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
याचिका दायर करने वाले क्लब के 11 सदस्यों की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से पब्लिक प्रीमिसेस (अनधिकृत कब्जेदारों को बेदखल करना) अधिनियम के तहत चल रही कार्रवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया।
केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए स्थायी काउंसिल आशीष दीक्षित ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पीपीए एक्ट के तहत चल रही कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई जा सकती और उन्होंने रिट याचिका की स्वीकार्यता पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि पीपी एक्ट के तहत उनके पास एस्टेट आफिसर के पास जाने का उपाय उपलब्ध है। याचिकाकर्ता विपिन अग्रवाल और अन्य लोगों ने कहा कि अधिकारियों की कार्रवाई उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और इसके कारण उन्हें उनकी संपत्ति से वंचित होना पड़ रहा है।
