'DTC ड्राइवरों की हड़ताल पर ESMA क्यों नहीं लगाया?' हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा सवाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने डीटीसी ड्राइवरों की हड़ताल पर दिल्ली सरकार और डीटीसी से पूछा कि उन पर एस्मा क्यों ...और पढ़ें

अदालत ने पूछा कि डीटीसी ड्राइवरों के खिलाफ एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (ईएसएमए) के प्रविधान क्यों लागू नहीं किए गए हैं।
HighLights
हाई कोर्ट ने डीटीसी ड्राइवरों की हड़ताल पर सवाल उठाया।
दिल्ली सरकार को एस्मा लागू करने पर फैसला लेने का निर्देश।
याचिकाकर्ता को स्थिति न सुधरने पर दोबारा आने की छूट।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार और दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (डीटीसी) से पूछा कि कई दिनों से हड़ताल कर रहे डीटीसी ड्राइवरों के खिलाफ एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (ईएसएमए) के प्रविधान क्यों लागू नहीं किए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने इसके साथ ही दिल्ली सरकार को ईएसएमए लागू करने पर फैसला लेने का निर्देश देते हुए जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं होता है तो याचिकाकर्ता फिर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
सुनवाई के दौरान डीटीसी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता अवनीश अहलावत ने कहा कि डीटीसी ड्राइवरों की कोई यूनियन नहीं है और इसमें शामिल लोग हड़ताल के लिए वाट्सएप मैसेज भेज रहे हैं और बसों में तोड़-फोड़ कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि डीटीसी ने स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाए हैं और अब लगभग 96 प्रतिशत बसें फिर से सेवा में हैं। उन्होंने बताया कि डीटीसी ने ईएसएमए लागू करने के लिए दिल्ली सरकार को एक फाइल भेजी थी। सार्वजनिक बसों के संचालन से जुड़े बस ड्राइवर, कंडक्टर और अन्य कर्मचारी अपने वेतन और अन्य सुविधाओं में बढ़ोतरी की मांग को लेकर 15 सितंबर से हड़ताल पर हैं।
याचिकाकर्ता अमी सिसोदिया ने याचिका में कहा कि महिलाओं के लिए उपलब्ध मुफ्त सार्वजनिक परिवहन सेवा न मिलने के कारण, उन्हें आने-जाने के लिए महंगे वैकल्पिक परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
याचिका में कहा गया है कि हड़ताल का असर छात्रों, दिहाड़ी मजदूरों, सैलरी पाने वाले कर्मचारियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, मरीजों और आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों पर पड़ रहा है, जो किफायती सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं।
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