'अपराध में नाबालिगाें के इस्तेमाल की कड़वी सच्चाई से आंखें नहीं मूंद सकते', जमानत देने से दिल्ली HC का इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने हत्या के मामले में बालिग के तौर पर मुकदमा झेल रहे एक नाबालिग को जमानत देने ...और पढ़ें

हत्यारोपी नाबालिग की जमानत याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने ठुकराई। फोटो: सांकेतिक
HighLights
हाई कोर्ट ने नाबालिग की जमानत याचिका खारिज की
नाबालिग पर बालिग के तौर पर मुकदमा चल रहा था
अदालत ने संगठित गिरोहों द्वारा नाबालिगों के इस्तेमाल पर चिंता जताई
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। हत्या के एक मामले में बालिग के तौर पर मुकदमा का सामना कर रहे नाबालिग को जमानत देने से दिल्ली हाई कोर्ट ने इनकार करते हुए अहम टिप्पणियां की हैं।
ट्रायल कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने वाली आरोपित अपीलकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि तथ्यों को देखते हुए यह सोचना गलत होगा कि अपीलकर्ता को नाबालिग मानते हुए उसके साथ नरमी बरती जाए।
पीठ ने कहा के वर्तमान समय में समाज की इस कड़वी सच्चाई से अदालत आंखें नहीं फेर सकती कि कैसे नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) जैसे विशेष कानूनों के बावजूद, संगठित गिरोह सामाजिक कल्याण कानूनों का दुरुपयोग करके, नाबालिगों के माध्यम से कई जघन्य अपराध करवा रहे हैं।
पुलिस की आशंका को निराधार नहीं मान सकते
पीठ ने कहा कि आवेदनकर्ता दो अन्य गंभीर मामले में भी शामिल था और एक अन्य हत्या के मामले में जमानत पर रहने के दौरान वह वर्तमान अपराध को शामिल था।
पीठ ने कहा कि ऐसे में दिल्ली पुलिस की आशंका को निराधार नहीं माना जा सकता कि अगर आरोपित को जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह कुछ अन्य अपराधियों के संपर्क में आ सकता है।
पीठ ने उक्त तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए आरोपित अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने रिकाॅर्ड पर लिया कि आवेदक पर एक वयस्क के तौर पर मुकदमा चलाने के फैसले को चुनौती नहीं दी गई है।
पहले ही हत्या के एक मामले में जमानत पर था नाबालिग
साथ ही, इस बात पर भी कोई विवाद नहीं है कि जब हत्या हुई थी, तब अपीलकर्ता पहले से ही एक अन्य हत्या के मामले में जमानत पर था। पीठ ने कहा कि आरोपित इन दो हत्या के मामलों के अलावा बदरपुर थाने में दर्ज एक अन्य मामले में भी आराेपित है।
सुनवाई के दौरान जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि सार्वजनिक गवाहों की अभी तक जांच नहीं हुई है और आरोपित द्वारा उन्हें डराने और धमकाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यह भी तर्क दिया कि हत्या का एक प्रत्यक्षदर्शी भी मौजूद है और घटना की सीसीटीवी फुटेज भी है।
वहीं, जमानत की मांग करते हुए आरोपित के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कानून के साथ संघर्षरत किसी बच्चे के जमानत मांगने के मामले में आरोप की गंभीरता और उस बच्चे का पिछला रिकाॅर्ड प्रासंगिक नहीं हैं। याचिका के अनुसार आरोपित के खिलाफ हत्या के मामले में वर्ष 2024 में बदरपुर में प्राथमिकी हुई थी।
