जानलेवा हीट स्ट्रेस के शिकंजे में दिल्ली, 10 साल में आधा ही रह गया ग्रीन कवर; CSE रिपोर्ट में डराने वाला खुलासा
दिल्ली में गहराते शहरी हीट क्राइसिस पर सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार, 2015-2024 के बीच शहर का 76 प्रतिशत क्षेत्र लगातार हीट स्ट्रेस में रहा है।

राजधानी दिल्ली तेजी से गहराते अर्बन हीट क्राइसिस की चपेट में है। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
दिल्ली का 76% क्षेत्र एक दशक से हीट स्ट्रेस में।
बाजार, स्कूल, निर्माण स्थल अत्यधिक गर्मी से प्रभावित।
हरित क्षेत्र घटा, आर्थिक नुकसान का अनुमान।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली तेजी से गहराते अर्बन हीट क्राइसिस की चपेट में है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015 से 2024 के बीच दिल्ली का लगभग 76 प्रतिशत क्षेत्र छह या उससे अधिक वर्षों तक हीट स्ट्रेस (अत्यधिक गर्मी के दबाव) का सामना करता रहा। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि शहर के अधिकांश निर्माण स्थल, बाजार और स्कूल ऐसे इलाकों में स्थित हैं जहां बार-बार अत्यधिक गर्मी दर्ज की गई।
किस रिपोर्ट में कया गया दावा?
"मेकिंग दिल्ली हीट-रेजिलिएंट: ए रोडमैप विद द फोकस ऑन वल्नरेबल ग्रुप्स" शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दस वर्षों में दिल्ली के 98.72 प्रतिशत क्षेत्र ने कम से कम एक बार हीट स्ट्रेस की सीमा को पार किया।
अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली के 92 प्रतिशत निर्माण प्रोजेक्ट ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां 2015 से 2024 के बीच भूमि सतह का तापमान कम से कम एक बार 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचा। वहीं, 77 प्रतिशत निर्माण स्थल ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां अत्यधिक गर्मी लगातार लौटती रही।
दिल्ली के 643 जगहों की स्थिति खराब
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के 643 चिन्हित बाजारों और प्रमुख मंडियों में से 84 प्रतिशत ऐसे इलाकों में स्थित हैं जहां बार-बार हीट स्ट्रेस की स्थिति बनती है। इसके अलावा, लगभग 13.2 लाख लोगों की आबादी वाली 76 प्रतिशत अनौपचारिक बस्तियां भी अत्यधिक गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में स्थित हैं।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि शहर के 1,066 स्कूलों में से 80 प्रतिशत हीट स्ट्रेस वाले इलाकों में स्थित हैं। रिपोर्ट ने मटियाला, ककरौला, नरेला और चांदनी चौक सहित 35 वार्डों को अत्यधिक या उच्च संवेदनशीलता वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है।
17 वार्ड पूरी तरह हीट स्ट्रेस से प्रभावित
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के 272 वार्डों में से 153 वार्ड ऐसे हैं जिनके 75 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में बार-बार हीट स्ट्रेस की स्थिति बनती है। वहीं, 82 वार्डों में 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र अत्यधिक गर्मी की चपेट में है, जबकि 17 वार्ड पूरी तरह हीट स्ट्रेस से प्रभावित हैं।
दिल्ली में गर्मी से होने वाली मौतें
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते तापमान के कारण दिल्ली एक गंभीर संकट का सामना कर रही है। वर्ष 2025 में राजधानी में महसूस किया जाने वाला तापमान (फील्स लाइक टेम्परेचर) 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2024 में दिल्ली में गर्मी से 25 लोगों की मौत हुई, जबकि स्वतंत्र रिपोर्टों में यह संख्या 55 से अधिक बताई गई है।
कंक्रीट वाले इलाकों में चौबीसों घंटे गर्मी
सीएसई के अनुसार, दिल्ली अब न्यू एंड वार्मर नॉर्मल की ओर बढ़ रही है। पिछले चार दशकों में वार्षिक औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों में वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली की रात में ठंडा होने की क्षमता में 9 प्रतिशत की कमी आई है। शहर का केंद्रीय क्षेत्र आसपास के बाहरी क्षेत्रों की तुलना में रात में 3.8 डिग्री सेल्सियस कम ठंडा हो पाता है, जिससे घनी आबादी और कंक्रीट वाले इलाकों में चौबीसों घंटे गर्मी बनी रहती है।
लगातार हीट स्ट्रेस वाले क्षेत्र
- पुरानी दिल्ली
- करोल बाग
- कश्मीरी गेट
- कनॉट प्लेस का इनर सर्कल
- उत्तम नगर
- पालम
- डाबड़ी
- नजफगढ़
- कंझावला
- बुद्ध विहार
- बवाना
- नरेला
इसके अलावा समयपुर बादली, भलस्वा, जहांगीरपुरी, बुराड़ी, शाहदरा, भजनपुरा, करावल नगर, गाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र, बदरपुर, मदनपुर खादर, ओखला औद्योगिक क्षेत्र, तुगलकाबाद, संगम विहार, महिपालपुर और आरके पुरम जैसे इलाके भी अत्यधिक गर्मी से प्रभावित पाए गए।
अध्ययन में बवाना, मायापुरी, मुंडका, आनंद पर्वत और मंगोलपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को प्रमुख हीट हॉटस्पॉट बताया गया है। कई रिहायशी इलाकों में भूमि सतह का तापमान 44 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
भूमि सतह का तापमान 60.77 डिग्री सेल्सियस पहुंचा
रिपोर्ट में भारत मंडपम, ईस्ट किदवई नगर आवासीय परिसर, सफदरजंग स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और नेताजी नगर पुनर्विकास परियोजना को भी हीट स्ट्रेस वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
अध्ययन के अनुसार, गर्मियों के दौरान इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तथा बंजर और बिना बोई गई कृषि भूमि वाले क्षेत्रों में भूमि सतह का तापमान 60.77 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दिल्ली का हरित क्षेत्र वर्ष 2014 में 25.36 प्रतिशत था, जो 2024 में घटकर 14.14 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में जल निकायों का क्षेत्रफल 1.25 प्रतिशत से घटकर 0.99 प्रतिशत रह गया। चिंता की बात यह है कि शहर के लगभग 35 प्रतिशत हरित और जल क्षेत्र भी हीट स्ट्रेस से प्रभावित हैं।
हालांकि, लुटियंस दिल्ली, सिविल लाइंस और दिल्ली कैंट जैसे कुछ इलाके घने वृक्षों और बेहतर छायादार संरचनाओं के कारण हीट स्ट्रेस की सीमा से नीचे बने हुए हैं। वहीं यमुना नदी के आसपास का क्षेत्र भी अपेक्षाकृत ठंडा पाया गया, जहां भूमि सतह का तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
आर्थिक लागत 150 से 250 अरब डॉलर
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो गर्मी से होने वाली उत्पादकता में कमी इस दशक के अंत तक भारत की जीडीपी का 4.5 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकती है, जिसकी अनुमानित आर्थिक लागत 150 से 250 अरब डॉलर हो सकती है।
सीएसई ने सुझाव दिया है कि दिल्ली में संवेदनशील वर्गों को केंद्र में रखकर हीट रेजिलिएंस रणनीति तैयार की जाए। इसके तहत तापरोधी छतों, सार्वजनिक कूलिंग सेंटरों, जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन और हरित क्षेत्रों के विस्तार जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
(पीटीआई के इनपुट के साथ)
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