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क्या 'बिहारी' होना गुनाह है? पूछते ही फफक पड़ा परिवार, दिल्ली में हेड काॅन्स्टेबल की सनक ने छीना घर का चिराग

Published: Mon, 27 Apr 2026 10:06 PM (IST)

पश्चिमी दिल्ली की प्रजापति कॉलोनी में हेड कांस्टेबल नीरज ने पांडव को गोली मारकर हत्या कर दी, क्योंकि उसने खुद ...और पढ़ें

परिवार के लोगों ने पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुए लगाए पोस्टर। जागरण

परिवार के लोगों ने पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुए लगाए पोस्टर। जागरण

HighLights

  1. हेड कांस्टेबल ने बिहारी पहचान पर पांडव को गोली मारी

  2. पांडव परिवार ने न्याय की मांग में पोस्टर लगाए

  3. आरोपी हेड कांस्टेबल नीरज को पुलिस ने गिरफ्तार किया

जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। बिंदापुर की प्रजापति काॅलोनी में रहने वाला पांडव, अपने परिवार के इकलौते सहारा थे। वह सादगी से अपनी जिंदगी जी रहे थे, लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी क्षेत्रीय पहचान ही उसकी मौत का कारण बन जाएगी।

रविवार को पांडव के अंतिम संस्कार के बाद उनके अस्थि कलश को रखकर उनके स्वजन ने इस मामले में न्याय की मांग शुरू कर दी है। पांडव के घर के आसपास सड़क पर जगह-जगह पोस्टर लगे हैं, जिन पर लिखा है- 'हमें न्याय चाहिए, क्या बिहारी होना गुनाह है' और 'रक्षक बना भक्षक'।

घटना के समय पांडव के साथ मौजूद इनके स्वजन का कहना है कि दीपक को केवल इसलिए मारा गया, क्योंकि उसने कहा कि वह बिहार का रहने वाला है।

बिहार का नाम सुनते ही हिंसक हो गया हेड काॅन्स्टेबल 

इस घटना के प्रत्यक्षदर्शियों में दीपक भी हैं। दीपक ने कहा कि वह उसी मोटरसाइकिल पर सवार थे, जिसपर पांडव थे। दीपक बताते हैं कि पांडव जैसे ही मोटरसाइकिल से घर जाने को हुए, हेड कांस्टेबल नीरज मकान से नीचे आया और उन्हें रोका और पूछताछ शुरू कर दी।

नाम पूछने के दौरान जैसे ही पांडव ने कहा कि मैं बिहार का रहने वाला हूं, नीरज का व्यवहार काफी हिंसक हो गया। गाली-गलौज और क्षेत्रीय भेदभाव की कड़वाहट हवा में घुल गई।

पांडव हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन...

पांडव हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा, हमें जाने दो, लेकिन नफरत और अहंकार के नशे में चूर नीरज ने अपनी पिस्टल निकाली और सीधे गोली चला दी। गोली चलते ही चीख-पुकार मच गई। पांडव और उसका एक साथी लहूलुहान होकर गिर पड़े। दीपक बताते हैं कि हैरान करने वाली बात यह थी कि गोली मारने के बाद भी नीरज के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था।

उसने धमकी भरे लहजे में कहा कि इसे अस्पताल ले जाओ वरना ये मर जाएगा, और तुम सब यहां से भागो क्योंकि इन गोलियों पर सबका नाम लिखा है। दीपक का कहना है कि इसके बाद वह ठंडे दिमाग से अपने घर गया, बैग उठाया और अपनी कार में बैठकर फरार हो गया।

भविष्य पर गहराया संकट

सोमवार को प्रजापति कालोनी का माहौल गमगीन था। पांडव की मां अभी भी अपने बेटे का नाम लेकर रो रही हैं। तीन भाई-बहनों व माता पिता के इस परिवार में पांडव ही एकमात्र कमाने वाला सदस्य था।

बीमार छोटा भाई, शादीशुदा बहन और उसके बच्चे, सबकी जिम्मेदारी पांडव के कंधों पर थी। किराए के एक कमरे में रहने वाले इस परिवार के सामने अब दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

क्या है घटना?

प्रजापति काॅलोनी निवासी पांडव अपने दोस्त कृष्ण व चचेरे भाई दीपक के साथ जाफरपुरकलां से अपने घर रविवार देर रात लौट रहे थे। तीनों एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे, सबसे आगे डिलिवरी ब्वाॅय का काम करने वाले पांडव थे।

आरोप है कि हेड कांस्टेबल नीरज ने पांडव को रोका और कहासुनी में अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए पांडव के सीने में गोली मार दी। यह गोली पांडव के सीने से निकलते हुए कृष्ण के पेट में जा लगी।

पांडव की मौत हो गई, वहीं कृष्ण का फिलहाल उपचार चल रहा है। इस मामले में पुलिस ने आरोपित नीरज को गिरफ्तार कर लिया है।

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