'अल्पसंख्यक आयोग में नियुक्ति पर समयसीमा क्यों नहीं', दिल्ली HC की केंद्र को फटकार; दो सप्ताह में मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष व सदस्यों के खाली पदों पर नियुक्ति की समयसीमा न बताने ...और पढ़ें

पीठ ने कहा कि अदालत यह नहीं समझ पा रही है कि हलफनामा में नियुक्ति की समयसीमा का कोई जिक्र नहीं है।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) में खाली पड़े अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कोई समयसीमा नहीं बताने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई। पिछले आदेश पर दाखिल किए गए हलफनामा को देखने बाद अदालत ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के उप सचिव से दो सप्ताह के भीतर समयसीमा नहीं देने पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया।
पीठ ने एएसजी से कहा- समयसीमा शब्द का मतलब पूछें
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि अदालत यह नहीं समझ पा रही है कि हलफनामा में नियुक्ति की समयसीमा का कोई जिक्र नहीं है। केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल साॅलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से पीठ ने कहा कि अदालत के आदेश को कितनी लापरवाही से लिया गया है। पीठ ने कहा कि हलफनामा दाखिल करने वाला अधिकार कौन है और संबंधित अधिकारी को तलब करके समयसीमा शब्द का मतलब पूछने की जरूरत है। पीठ ने एएसजी से कहा कि बेहतर होगा कि आप उन्हें अपने चैंबर में तलब करें।
सुनवाई तीन जुलाई तक के लिए स्थगित
पीठ ने रिकाॅर्ड पर लिया कि हलफनामा में कहा गया है कि मंत्रालय ने खाली पदों पर नियुक्ति के लिए जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी है और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त बायोडाटा और नामांकन की जांच की जा रही है। हलफनामा में कहा गया कि प्रस्तावों की जांच की जा रही है और यह मामला सक्षम प्राधिकारी के सक्रिय विचारधीन है। पीठ ने स्पष्टीकरण पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई तीन जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।
आयोग पूरी तरह से निष्क्रिय
छह फरवरी को हुई पिछली सुनवाई पर अदालत ने केंद्र सरकार से खाली पदों को भरने के मुद्दे पर एक बेहतर हलफनामा दायर कर नियुक्ति की समयसीमा बताने को कहा था। आयोग में खाली पदों के संबंध में याचिकाकर्ता मुजाहिद नफीस ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि खाली पदों के कारण आयोग में काम नहीं हो रहा है और आयोग पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया है।
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