कैब और बाइक-टैक्सी में महिलाओं की सुरक्षा पर HC सख्त, उबर और रैपिडो के साथ ही केंद्र सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने ऐप-आधारित कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं में महिला यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने वाली जनहित याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार सहित अन्य से जवाब मांगा है।

ऐप बेस्ड कैब में महिला सुरक्षा को लेकर चिंता। फोटो: आर्काइव
HighLights
महिला यात्रियों की सुरक्षा पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
ऐप-आधारित कैब सेवाओं के लिए मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाने की मांग
ड्राइवर सत्यापन, शिकायत निवारण, आपातकालीन प्रतिक्रिया पर विशेष ध्यान
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में एप-बेस्ड कैब, बाइक-टैक्सी और दूसरी राइड-हेलिंग सर्विस का इस्तेमाल करने वाली महिला यात्रियों के लिए अधिक मजबूत और एक जैसे सुरक्षा उपाय करने की मांग वाली जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, उबर इंडिया, रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज सहित अन्य से जवाब मांगा है।
सुरक्षा प्रोटोकाल बनाने की मांग
याचिकाकर्ता आदित्य सहगल ने याचिका में मौजूदा सुरक्षा उपायों की पूरी समीक्षा करने और उबर, रैपिडो और इसी तरह के दूसरे एप-बेस्ड ट्रांसपोर्टेशन एग्रीगेटर्स के लिए जरूरी सुरक्षा प्रोटोकाल और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की मांग की गई है।
सहगल ने याचिका में ड्राइवर के सत्यापन और आपराधिक इतिहास की जांच, ड्राइवर और गाड़ी की पहचान, रूट से भटकने, इमरजेंसी रिस्पान्स, शिकायत निवारण, सहित अन्य चिंताओं का मामला उठाया है।
याचिका में कहा गया है कि पहले उबर इंडिया सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (रैपिडो) और दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को मौजूदा सुरक्षा उपायों के संबंध में जानकारी दी गई थी। हालांकि, प्राधिकारियों द्वारा उठाई गई खास चिंताओं का ठीक से समाधान नहीं किया गया।
ड्राइवर और गाड़ी की पहचान तय हो
याचिका में यह सुनिश्चित करने का निर्देश देेने की मांग की गई है कि राइड के लिए आने वाले ड्राइवर और गाड़ी की जानकारी वही हो जो ऐप पर दिख रही है।
इसमें मांग की गई है कि ड्राइवर या गाड़ी को बिना इजाजत बदलने को सुरक्षा से जुड़ी घटना माना जाए और यात्रियों को बिना किसी जुर्माना के ऐसी राइड रद करने की अनुमति दी जाए।
एसओएस के लिए कमांड सेंटर
याचिका में इमरजेंसी और एसओएस अलर्ट पाने, उन पर नजर रखने और जवाब देने के लिए सौबीस घंट कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाने की भी मांग की गई है।
याचिका में ड्राइवर के गलत व्यवहार, उत्पीड़न, मारपीट, रूट से भटकने, ड्राइवर या गाड़ी को बिना इजाजत बदलने और एसओएस के फेल होने जैसी शिकायतों के लिए एक तय समय-सीमा वाला शिकायत निवारण सिस्टम बनाने की भी मांग की गई है।
