बिना बायोमेट्रिक नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलिंडर, इस नियम के खिलाफ दिल्ली HC में याचिका; केंद्र को नोटिस
दिल्ली हाई कोर्ट ने घरेलू एलपीजी रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन अनिवार्य करने के खिलाफ केंद्र सरकार को नोटिस ...और पढ़ें

नए निमय के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची याचिका। फोटो: आर्काइव
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
एलपीजी रिफिल पर बायोमीट्रिक आधार अनिवार्य करने को चुनौती।
3.16 करोड़ उपभोक्ता प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एक अक्टूबर से तय कीमत पर घरेलू एलपीजी रिफिल बुक करने के लिए बायोमीट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (बीएए) अनिवार्य करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से जवाग मांगा है।
याचिका में कहा गया है कि इस कदम से ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया पूरी न करने वाले लगभग 3.16 करोड़ उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने केंद्र सरकार को मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई पांच अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी।
बीएए अनिवार्य करने को दी चुनौती
प्रमाणित रूप से 75 प्रतिशत स्थायी दृष्टि दिव्यांगता से ग्रस्त याचिकाकर्ता वकील पुलकित लूथरा ने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के 17 सितंबर के पत्र और 19 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति को चुनौती दी है।
इसमें घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बीएए अनिवार्य किया गया है। उन्होंने तर्क दिया है कि यह निर्णय मनमाना, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इसके तहत बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा करने में असमर्थ उपभोक्ताओं को तय खुदरा बिक्री मूल्य पर नियमित घरेलू एलपीजी सिलिंडर प्राप्त करने से वंचित कर सकता है।
3.16 करोड़ उपभोक्ता प्रभावित होने का दावा
याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पराग त्रिपाठी ने तर्क दिया कि यह विकल्प अपर्याप्त है क्योंकि यह ऐसे उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य पर मानक 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलिंडर खरीदना जारी रखने की अनुमति नहीं देता है।
याचिका में कहा गया है कि 14 सितंबर तक लगभग 3.16 करोड़ घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं ने बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं किया था।
वैकल्पिक व्यवस्था पर भी उठे सवाल
याचिका में कहा गया कि बायोमीट्रिक के बार-बार फेल होने की स्थिति में उपभोक्ताओं के लिए कोई स्पष्ट और आसानी से उपलब्ध होने वाला वैकल्पिक तरीका नहीं बताया गया है। याचिका में कहा गया कि यह मुद्दा घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के एक बड़े वर्ग को प्रभावित करता है।
