प्रोटेस्ट रेगुलेट करने की याचिका दिल्ली HC में दायर, SOP लागू करने की मांग; 16 को केंद्र सरकार देगी जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने विरोध-प्रदर्शनों को रेगुलेट करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

विरोध प्रदर्शनों को रेगुलेट करने की मांग। फोटो: आर्काइव
HighLights
विरोध-प्रदर्शनों के लिए SOP लागू करने की मांग पर सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया
प्रदर्शनों से कारोबारी गतिविधियों पर असर का मुद्दा उठा
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के तरीकों पर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
विरोध-प्रदर्शन से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने की मांग वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितित वासुदेव साम्ब्रे व न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले पर अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।
व्यापारी की तरफ से दायर की गई याचिका पर पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।
तय जगह पर ही प्रदर्शन का आदेश देने की मांग
उन्होंने तय जगहों पर ही प्रदर्शन करने के संबंध में अंतरिम निर्देश देने की मांग की। इस दौरान पीठ को बताया गया कि इसी तरह के मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
इस पर पीठ ने अधिकारियों से अपना रुख रिकॉर्ड पर रखने को कहा। वहीं, एक अन्य याचिकाकर्ता व अधिवक्ता ऋषभ सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों और दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर को भी लागू करने की मांग की है।
याचिका में विरोध प्रदर्शनों के दौरान यातायात प्रबंधन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की मांग की गई है। अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर आधारित हैं।
इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार अपना रुख और सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जानकारी रिकॉर्ड पर रखेगी। उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत ने सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी।
NSUI की याचिका पर केंद्र सरकार की आपत्ति
10 अक्टूबर को कनाट प्लेस और जंतर-मंतर के पास की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और आम जनता पर हुए हमलों की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ द्वारा दायर की गई याचिका की स्वीकार्यता पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई।
दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट जनहित याचिका नियम 2010 का हवाला देते हुए कहा कि अगर याचिकाकर्ता कोई संगठन है, तो उसके कामकाज की प्रकृति के बारे में बताना जरूरी है।
इस मामले में याचिकाकर्ता NSUI, कांग्रेस की युवा शाखा का पदाधिकारी है। याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब में कहा कि याचिका व्यक्तिगत हैसियत से दायर की गई थी और मांगें बहुत सीमित हैं।
इस पर अदालत ने एएसजी को प्रारंभिक आपत्तियां दाखिल करने की अनुमति दी।
मेट्रो-रेलवे बंद करने पर शुक्रवार को सुनवाई
10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद करने, रेलवे सेवा में रुकावट सहित अन्य मुद्दों से जुड़ी याचिका पर हाई कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा।
मामले पर हुई संक्षिप्त सुनवाई के दौरान एएसजी ने अदालत को बताया कि इससे जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उस पर गुरुवार को सुनवाई होनी है।
इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 16 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी। एक विधि छात्रा अंशिका त्रिपाठी और एक वकील ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और ट्रांसपोर्ट अधिकारियों द्वारा लगाई गई पाबंदियां जरूरत से अधिक थीं।
