विरोध प्रदर्शन रोकने का अधिकार है, पर घर में घुसकर नजरबंद कैसे कर सकती है दिल्ली पुलिस? HC ने मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टिविस्ट को घर में नजरबंद करने के मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस ने मांगा जवाब। फोटो: आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
नदीम खान को जंतर-मंतर जाने से रोका गया
पुलिस को 15 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करना है
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एक्टिविस्ट नदीम खान को 29 सितंबर को उनके घर में नजरबंद करने के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितित वासुदेव साम्ब्रे व न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने पूछा, पुलिस किसी व्यक्ति के घर में कैसे घुस सकती है और याचिकाकर्ता को नजरबंद करने का पुलिस के पास क्या कारण है?
नजरबंदी पर पुलिस से मांगा जवाब
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से सवाल किया है कि उसने एक्टिविस्ट नदीम खान को 29 सितंबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से क्यों रोका।
कोर्ट ने कहा है कि विरोध प्रदर्शन की अनुमति न देना पुलिस का अधिकार है, लेकिन वे किसी व्यक्ति को नजरबंद नहीं कर सकते। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्होंने खान को हिरासत में नहीं लिया, बल्कि सिर्फ उन्हें जंतर-मंतर जाने से रोका था।
15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले पर अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
बिना नोटिस घर और आफिस पहुंची थी पुलिस
नदीम खान की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता शाहरुख आलम ने तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि 29 सितंबर को पुलिस अधिकारी बिना किसी नोटिस या आदेश के उनके मुवक्किल के घर और उसी परिसर में स्थित आफिस आए और उन्हें हिरासत में ले लिया।
उन्होंने कहा कि उस दिन से लगातार उन पर नजर रखी जा रही है और उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।
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