लक्ष्मी योजना के लिए सांसद या विधायक की मंजूरी क्यों है जरूरी है? दिल्ली सरकार से हाई कोर्ट का सवाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए सांसद या विधायक की मंजूरी अनिवार्य करने पर नाराजगी जताई है। ...और पढ़ें

महिलाओं को योजना के लिए पंजीकरण कराने में हो रही है परेशानी। फोटो: आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने दिल्ली लक्ष्मी योजना पर नाराजगी जताई
सांसद या विधायक की मंजूरी की शर्त पर सवाल उठाया
पात्रता जांचने के लिए अन्य तरीके अपनाने को कहा
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली लक्ष्मी योजना का लाभ उठाने के लिए स्थानीय सांसद या विधायक की मंजूरी अनिवार्य होने संबंधी दिल्ली सरकार के निर्णय पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को नाराजगी व्यक्त की।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज मांगकर पात्रता का पता लगाया जा सकता है। पीठ ने कहा कि अदालत इसे मंजूरी नहीं दे सकती है।
साथ ही दिल्ली सरकार से पूछा कि योजना का लाभ लेने के लिए आखिर सांसद या विधायक की मंजूरी क्यों जरूरी है, जबकि इसकी जांच के लिए अन्य कई तरीके हो सकते हैं।
इस टिप्पणी के साथ ही पीठ ने दिल्ली सरकार के अधिवक्ता को इस संबंध सरकार से निर्देश लेकर 24 अगस्त को अदालत को सूचित करने को कहा। पीठ ने दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वकील से पूछा कि आम नागरिकों को सांसद या विधायक के पास जाने के लिए क्यों कह रहे हैं?
योजना में मंजूरी की शर्त पर उठाए सवाल
कांग्रेस के पूर्व पार्षद अभिषेक दत्त और मौजूदा पार्षद वेदपाल शीतल चौधरी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि योजना में सांसद या विधायक की मंजूरी की कोई शर्त नहीं बताई गई है, जबकि इसमें लाभ उठाने के लिए पात्रता के विस्तृत नियम तय किए गए हैं।
पीठ ने कहा कि अदालत की प्राथमिक राय है कि यह पता लगाने के लिए कि कोई महिला पात्रता पूरी करती है या नहीं, कई तरह के दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
पीठ ने कहा कि इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि किसी महिला को अपने क्षेत्र के सांसद या विधायक की मंजूरी मिले या न मिले। किसी भी स्थिति में, योजना में मंजूरी पत्र की कोई शर्त नहीं बताई गई है।
राजनीतिक संरक्षण का जरिया बनाने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि योजना के तहत स्थानीय सांसद या विधायक से अनिवार्य मंजूरी या सिफारिश पत्र की शर्त राजनीतिक प्रतिनिधियों को बेहिसाब अधिकार देती है।
याचिका में कहा गया कि यह शर्त राज्य की कल्याणकारी योजना को राजनीतिक संरक्षण का जरिया बना देती है। याचिका में कहा गया कि योजना एक अगस्त को शुरू हुई है और जब सरकार ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल लाॅन्च किया तो पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए संबंधित सांसद या विधायक की सिफारिश या मंजूरी पत्र जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।
शिकायत का सिस्टम नहीं होने पर सवाल
याचिका में कहा गया है कि ऐसी सिफारिशें करने के लिए सांसदों या विधायकों के लिए न तो कोई समय-सीमा या निर्णय लेने के पैमाने तय हैं और न ही ऐसी मंजूरी को नामंजूर किए जाने की स्थिति में शिकायत निवारण का कोई तरीका है।
पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग की
याचिका में इस योजना के तहत आर्थिक मदद की जांच और वितरण के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना मनमानी वाले प्रशासनिक दिशा-निर्देश बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि इसमें कोई राजनीतिक दखल या बिना किसी नियम के अधिकारियों की मनमानी न हो।
