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मास्टर प्लान 2047: दिल्ली के गांवों में अमेरिका जैसा लग्जरी अहसास, 'बेवर्ली हिल्स' की तर्ज पर बनेंगे आलीशान घर

Published: Wed, 19 Aug 2026 07:50 PM (IST)

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के तहत बिजवासन, कापसहेड़ा जैसे इलाकों को अमेरिका के बेवर्ली हिल्स की तर्ज पर आलीशान घरों ...और पढ़ें

दिल्ली के गांवों को अमेरिका के 'बेवर्ली हिल्स' की तर्ज पर किया जाएगा डेवलप। (एआई जेनरेटेड इमेज)

दिल्ली के गांवों को अमेरिका के 'बेवर्ली हिल्स' की तर्ज पर किया जाएगा डेवलप। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. दिल्ली में बेवर्ली हिल्स जैसे आलीशान आवासीय क्षेत्र बनेंगे।

  2. बिजवासन, कापसहेड़ा, छतरपुर जैसे इलाके शामिल होंगे।

  3. बड़े भूखंड, हरियाली, आधुनिक सुविधाओं पर जोर रहेगा।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राजधानी में धनाढ्य वर्ग और बड़े उद्योगपतियों का नया पता अब केवल लुटियंस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली के मास्टर प्लान (एमपीडी-2047) में भव्य रहन-सहन व महत्वाकांक्षी वर्ग को ध्यान में रखते हुए एक नया ढांचा तैयार किया गया है।

इसके तहत बिजवासन, कापसहेड़ा, छतरपुर, नजफगढ़ और नरेला-अलीपुर के सीमावर्ती इलाकों को अमेरिका के प्रसिद्ध 'बेवर्ली हिल्स' की तर्ज पर बेहद आलीशान बड़े मकानों और फार्म हाउस क्षेत्रों के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

पता हो कि बेवर्ली हिल्स यूएसए के कैलिफोर्निया राज्य में लास एंजिल्स काउंटी का एक प्रसिद्ध और समृद्ध शहर है। यह अपनी लग्जरी जीवनशैली, आलीशान बंगलों और रोडियो ड्राइव जैसी महंगी खरीदारी की जगहों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।

150 वर्ग किमी में फैला कम-घनत्व क्षेत्र

मास्टर प्लान के नीतिगत ढांचे के अनुसार, दिल्ली की सीमाओं से सटे लगभग 150 वर्ग किमी के कम-घनत्व क्षेत्र और भूमि एकत्रीकरण नीति के तहत करीब 200 वर्ग किमी का क्षेत्र इस विशेष विकास के लिए तय किया गया है। कंक्रीट के जंगलों से अलग यहां पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं।

मास्टर प्लान के तहत इन इलाकों में बनने वाले बड़े मकानों और भवनों के लिए कम से कम 4,000 वर्ग मीटर (लगभग एक एकड़) के बड़े भूखंडों का प्रविधान रखा गया है। इसके साथ ही, कुल जमीन के कम से कम 50 प्रतिशत हिस्से पर अनिवार्य रूप से हरियाली रखना तय हुआ है।

नए मार्गों से सीधी पहुंच

शहरी योजनाकारों के अनुसार, इस नए आवासीय क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान पहुंच होगी। नवनिर्मित दूसरे शहरी विस्तार मार्ग (यूईआर-II) और द्वारका एक्सप्रेस वे के आसपास का इलाका इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सीधे जुड़ेगा। इससे न केवल दिल्ली बल्कि आसपास के पड़ोसी शहरों के बड़े व्यापारियों और कंपनी प्रमुखों के लिए यह पहली पसंद बनेगा।

क्यों बदल रहा है महंगे मकानों का चलन?

अब तक राजधानी के अति अमीर और संभ्रांत लोग लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक बंगलों को ही अपना मुख्य ठिकाना मानते थे। लेकिन उस क्षेत्र में जगह की कमी और पुरानी इमारतों की बंदिशों के कारण अब लोगों का रुझान बड़े फार्म हाउसों, निजी स्विमिंग पूल, सौर ऊर्जा से चलने वाले मकानों और त्रिस्तरीय सुरक्षा वाले आवासीय परिसरों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मास्टर प्लान का यह नया माडल अमीर लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शांति व सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

1. कहां-कहां बसेगी यह आलीशान दिल्ली?

-प्रमुख गांव और इलाके : नजफगढ़, कापसहेड़ा, बिजवासन, छतरपुर, नरेला और अलीपुर के बाहरी ग्रामीण इलाके, जिन्हें कम-आबादी वाले क्षेत्र और लैंड पूलिंग नीति में शामिल किया गया है।

-आवागमन के रास्ते : दूसरा शहरी विस्तार मार्ग (यूईआर-II) और द्वारका एक्सप्रेस वे के पास का 250 मीटर चौड़ा क्षेत्र, जो सीधे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और गुरुग्राम से जुड़ेगा।

2. नियम और जरूरी मानक

-भूखंड का न्यूनतम आकार : कम से कम 4,000 वर्ग मीटर (लगभग एक एकड़) की ज़मीन होना अनिवार्य है।

-हरियाली का नियम : कुल ज़मीन के कम से कम 50 प्रतिशत हिस्से पर पेड़-पौधे और हरियाली रखना ज़रूरी है (कंक्रीट के पक्के निर्माण पर सख्त रोक रहेगी)।

-ऊंचाई और निर्माण की सीमा : कम आबादी वाले क्षेत्र होने के कारण यहां केवल दो से तीन मंजिल तक की कम ऊंचाई वाली इमारतों (विशिष्ट मकानों) की ही अनुमति होगी, ताकि चारों तरफ खुलापन बना रहे।

3. मिलने वाली आधुनिक सुविधाएं

-निजी परिसर : स्विमिंग पूल, बड़े परिसरों में निजी हेलीपैड की सुविधा, जैविक खेती का स्थान और सौर ऊर्जा से चलने वाले पर्यावरण-अनुकूल मकान।

-सुरक्षा व्यवस्था : सुरक्षा के तीन स्तर, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और निजी क्लब हाउस।

-पर्यावरण के अनुकूल उपाय : गंदे पानी को पूरी तरह साफ करके दोबारा इस्तेमाल करने का संयंत्र और वर्षा जल संचयन अनिवार्य होगा।

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