'दिल्ली के चौराहों पर कबूतरों को दाना देना बंद हो', स्वास्थ्य के लिए बन रहा खतरा; दिल्ली HC में याचिका दायर
दिल्ली में जगह-जगह पर लोग कबूतरों को खाना खिलाते हैं। हाई कोर्ट में सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने ...और पढ़ें

दिल्ली में कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक की मांग। फोटो-जागरण आर्काइव
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट में कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक की मांग।
स्वास्थ्य खतरों, विशेषकर श्वसन संबंधी बीमारियों के जोखिम का हवाला।
याचिका में दिल्ली सरकार और अन्य एजेंसियों से कार्रवाई की मांग।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालने से पैदा हो रहे स्वास्थ्य खतरे को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
अधिवक्ता वैभव कुमार ने याचिका दायर कर दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी), दिल्ली पुलिस और संबंधित एजेंसियों से अनधिकृत जगहों पर दाना डालने पर रोक लगाने और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है।
अधिवक्ता ने दायर की याचिका
अधिवक्ता राजेश कुमार के माध्यम से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि कबूतरों के झुंड से सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर बीट व पंख जमा होते हैं। इनके सूखकर बारीक कण बनने पर वे हवा में फैलते हैं और लोग सांस के जरिए उन्हें अंदर ले सकते हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष खतरा है।
याचिका में पायलट स्टडी का दिया हवाला
याचिका में वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट, दिल्ली विश्वविद्यालय के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की जनवरी 2025 में लंग इंडिया में प्रकाशित पायलट स्टडी का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि पक्षियों के संपर्क से हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस से पीड़ित 18 मरीजों के घरों से लिए गए सभी धूल के नमूनों में कबूतर की बीट का प्रोटीन मिला।
लगभग आधे नमूनों में पंख का प्रोटीन भी पाया गया। गंभीर मामलों में इससे फेफड़ों के टिश्यू को स्थायी नुकसान हो सकता है। याचिका में अनधिकृत जगहों पर दाना डालने पर रोक, प्रभावित स्थलों की नियमित सफाई के साथ ही प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
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