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दिल्ली HC ने सजा माफी की अर्जी बार-बार खारिज करने को बताया ‘मनमाना’, 22 साल जेल काट चुके दोषी की रिहाई के आदेश

Published: Wed, 08 Apr 2026 05:57 AM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के दोषी रजब अली को 22 साल से अधिक जेल काटने के बाद समय से ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने बार-बार सजा माफी की अर्जी खारिज करने को बताया मनमाना। फाइल फोटो

दिल्ली हाई कोर्ट ने बार-बार सजा माफी की अर्जी खारिज करने को बताया मनमाना। फाइल फोटो

HighLights

  1. दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के दोषी की रिहाई का आदेश दिया।

  2. सजा समीक्षा बोर्ड द्वारा अर्जी खारिज करना मनमाना बताया गया।

  3. दोषी रजब अली ने 22 साल से अधिक जेल काटी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को समय से पहले रिहा करने का निर्देश देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) द्वारा बार-बार सिर्फ अपराध की जघन्यता के आधार पर सजा माफी की अर्जी खारिज करना मनमाना होने के साथ ही सुधारात्मक न्याय के तय सिद्धांतों के खिलाफ है।

अपीलकर्ता कैदी रजब अली ने 22 साल से ज्यादा की जेल की सजा काटी है। कैदी को राहत देते हुए न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने रजब अली की अर्जी मंजूर कर ली।

रजब अली ने उसकी समय से पहले रिहाई की अर्जी खारिज करने के एसआरबी के फैसले को चुनौती दी थी। रजब अली को 2005 में दुष्कर्म के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

दसवीं बार खारिज की थी अर्जी 

2016 में एसआरबी ने मुख्य प्रोबेशन अधिकारी की सिफारिश के बावजूद अपराध की प्रकृति, गंभीरता और पीड़ित के परिवार को होने वाले संभावित खतरे के आधार पर रजब अली की अर्जी खारिज कर दी थी। 2016 से 2024 तक एसआरबी ने दसवीं बार उसकी अर्जी अपराध की जघन्यता और गंभीरता और विकृति को देखते हुए खारिज कर दी थी।

रजब अली ने बताया कि उसे तीन बार पैरोल पर और कोरोना महामारी के एक बार आपात पैरोल पर रिहा किया गया था और उसके बाद 2021 में फिर से पैरोल मिली थी। उसे 22 बार फर्लो (अस्थायी छुट्टी) भी दी गई थी।

पीठ ने कहा कि सजा माफी की अर्जी बार-बार एक ही आधार पर खारिज की गई। अदालत ने कहा कि सजा माफी के लिए रजब अली के मामले पर विचार करते समय अपराध की गंभीरता या जघन्यता की तुलना उसके सुधार और समाज में फिर से घुलने-मिलने की उसकी तत्परता से की जानी चाहिए।

अदालत ने पाया कि रजब अली का जेल के अंदर का बर्ताव और उसका कुल मिलाकर आचरण संतोषजनक पाया गया था। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता चार सितंबर 2017 से सेमी-ओपन जेल में है, जोकि उसके पूरी तरह से सुधरे हुए आचरण को दर्शाता है।

अदालत ने माना कि 22 साल की कैद और (छूट सहित) 28 साल की कैद बिना किसी प्रतिकूल टिप्पणी के बिताने के बाद अपीलकर्ता एक पूरी तरह से सुधरा हुआ व्यक्ति है जो समाज में वापस जाने के लिए उपयुक्त है।

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