केजरीवाल-सिसोदिया समेत AAP नेताओं को दिल्ली HC का नोटिस, जस्टिस स्वर्णकांता के खिलाफ चले कैंपेन पर मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति घोटाले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया अभियान ...और पढ़ें

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा अवमानना के केस में आप नेताओं को नोटिस। फोटो: आर्काइव
HighLights
AAP नेताओं को दिल्ली हाई कोर्ट का नोटिस
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ अभियान का आरोप
अवमानना मामले में 4 अगस्त को अगली सुनवाई
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति घोटाले के मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित अभियान चलाने के आरोप में आम आदमी पार्टी के कई नेताओं को नोटिस जारी किया है।
अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और विनय मिश्रा समेत अन्य से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि अदालत की सहायता के लिए अगली सुनवाई में एक एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया जाएगा। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की डिवीजन बेंच मंगलवार को इस आपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई की।
सोशल मीडिया अभियान चलाने का आरोप
यह मामला सोशल मीडिया पर कथित मानहानिकारक और न्यायपालिका को बदनाम करने वाली पोस्ट और टिप्पणियों को लेकर शुरू किया गया है। दरअसल, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने हाल ही में अदालत में कहा था कि उनके खिलाफ बेहद अपमानजनक, अवमाननापूर्ण और मानहानिकारक सामग्री सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही है।
इसके बाद उन्होंने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक समेत अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था।
सीबीआई याचिका की सुनवाई दूसरे बेंच के पास भेजी
जस्टिस शर्मा ने यह भी कहा था कि कानूनी प्रक्रिया के तहत वह शराब नीति घोटाले के मामले को दूसरी बेंच के पास भेज रही हैं, क्योंकि अवमानना की कार्यवाही शुरू होने के बाद वही जज मूल मामले की सुनवाई जारी नहीं रख सकते।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया था जब अरविंद केजरीवाल ने पहले जस्टिस शर्मा की बेंच से मामले को हटाने की मांग की थी। उन्होंने अदालत में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताई थी।
ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सीबीआई ने दी है चुनौती
गौरतलब है कि ट्रायल कोर्ट ने फरवरी 2026 में आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था।
अदालत ने कहा था कि CBI आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी। इसके बाद सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
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