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जज स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ चल रहा सोशल मीडिया अभियान, केजरीवाल के हलफनामे को CBI ने बताया गलत मिसाल

Published: Thu, 16 Apr 2026 10:07 PM (IST)

सीबीआइ ने दिल्ली हाई कोर्ट में अरविंद केजरीवाल के हलफनामे का विरोध किया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति ...और पढ़ें

सीबीआई ने केजरीवाल के हलफनामे का विरोध किया। फोटो: सांकेतिक

सीबीआई ने केजरीवाल के हलफनामे का विरोध किया। फोटो: सांकेतिक

HighLights

  1. सीबीआई ने न्यायमूर्ति के खिलाफ सोशल मीडिया अभियान का आरोप लगाया

  2. केजरीवाल के हलफनामे को न्यायपालिका के लिए गलत मिसाल बताया

  3. दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले पर फैसला सुरक्षित रखा है

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आबकारी घोटाला मामले में अपील याचिका पर सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को अलग करने की मांग वाली अर्जियों पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ताजा हलफनामा में दिए गए तर्कों का केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने दिल्ली हाई कोर्ट में विरोध करते हुए गंभीर आरोप लगाया है।

सीबीआई ने अपने लिखित बयान में आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ एक सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण तरीके से इंटरनेट मीडिया पर अभियान चलाया जा रहा है। आम आदमी पार्टी संरक्षक और अन्य लोगों के इशारे पर उन पर दबाव बनाने के लिए अपमानजनक जानकारी इंटरनेट मीडिया पर फैलाई जा रही है।

जांच एजेंसी ने अपने हलफनामा ने कहा कि न्यायमूर्ति के बच्चों को दिए गए सरकारी पैनल के काम के संबंध में केजरीवाल ने मनगढ़ंत आरोप लगाने वाली गलत सूचना सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही है।

न्यायपालिका के व्यापक हित में ऐसी अनैतिक, अस्वस्थ और अराजक प्रथाओं को जड़ से खत्म करने की मांग करते हुए सीबीआई ने कहा कि सुनियोजित इंटरनेट मीडिया अभियान के बाद न्यायमूर्ति शर्मा का खुद को इस मामले से अलग करना एक बहुत गलत मिसाल कायम करेगा।

अरविंद केजरीवाल ने आबकारी घोटाला मामले में सीबीआइ की अपील याचिका पर सुनवाई से न्यायमूर्ति शर्मा को अलग करने की मांग को लेकर अर्जी दायर की है और अदालत ने 13 अप्रैल को सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले पर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। साथ ही लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

केजरीवाल के तर्क का सीबीआई ने किया विरोध

सीबीआई द्वारा दाखिल किए गए हलफनामा में तर्क दिया गया है कि अगर न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चों के सरकारी पैनल में शामिल होने के केजरीवाल के तर्क को स्वीकार कर लिया जाता है तो वे सभी जज अयोग्य हो जाएंगे, जिनके रिश्तेदार सरकारी पैनल में हैं और जो ऐसी सरकारों/राजनीतिक नेताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हैं।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष दाखिल लिखित जवाब में सीबीआई ने कहा कि छोटा हो या बड़ा, पूरे देश के सभी जज ऐसी सरकारों या किसी भी राजनीतिक नेता से जुड़े मामलों की सुनवाई करने के लिए अयोग्य हो जाएंगे, अगर उनके रिश्तेदार केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी सरकारी पैनल में हैं।

सीबीआई ने यह भी कहा कि केजरीवाल के तर्क के अनुसार, वे सभी जज जिनके रिश्तेदार केंद्र या राज्य सरकार या किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) के पैनल में हैं, वे संबंधित राज्य सरकारों, केंद्र सरकार या संबंधित पीएसयू के मामलों की सुनवाई करने के लिए अयोग्य हो जाएंगे।

सीबीआई ने कहा कि केजरीवाल की दलील के हिसाब से, वह अधिवक्ता भी अयोग्य हो जाएगा जो सभी पैनल वकीलों को मामले सौंपता है और वह ऐसे सभी जजों (जिनके रिश्तेदार सरकारी पैनल में हैं) के सामने पेश नहीं हो पाएगा।

केजरीवाल के अतिरिक्त हलफनामा को रिकाॅर्ड पर लिया

वहीं, दूसरी तरफ न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दाखिल अतिरिक्त शपथपत्र को रिकार्ड पर ले लिया। गुरुवार को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष पेश होकर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनके शपथपत्र को रिकार्ड पर नहीं लिया जा रहा है।

हलफनामा को रिकार्ड पर लेते हुए अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि इस नए हलफनामे को रिकार्ड पर लेने का मतलब यह नहीं होगा कि अब और सुनवाई होगी। अदालत ने कहा कि इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया है और इस पर अब आगे कोई सुनवाई नहीं होगी। उक्त हलफनामा में केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चों के सरकारी पैनल में शामिल होने का हवाला दिया है।

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