एक्सीडेंट होने पर सड़क पर कुत्ता आने का बहाना नहीं चलेगा, दिल्ली HC ने कहा- ड्राइवर को गाड़ी पर कंट्रोल रखना जरूरी
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सड़क पर अचानक जानवर आने का बहाना बनाकर चालक अपनी लापरवाही से नहीं बच सकता, क्योंकि गाड़ी पर नियंत्रण रखना उसकी जिम्मेदारी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सड़क पर वाहन चलाते समय अचानक कुत्ता आदि आने की बात कहने वालों के लिए बड़ी टिप्पणी की है। एआई इमेज
HighLights
चालक को सड़क पर सतर्क रहना, नियंत्रण बनाए रखना जरूरी।
अचानक जानवर आने पर भी लापरवाही से नहीं बच सकता चालक।
हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की मुआवजे की अपील खारिज की।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सड़क पर अचानक कुत्ता या कोई दूसरा आवारा पशु आ जाने का बहाना बनाकर चालक अपनी लापरवाही से बच नहीं सकता। गाड़ी चलाते समय सड़क पर आने वाले संभावित खतरों के प्रति सतर्क रहना और गाड़ी पर नियंत्रण बनाए रखना चालक की जिम्मेदारी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज कर दी।
गाड़ी चलाते समय नियंत्रण जरूरी
न्यायमूर्ति अनिश दयाल की पीठ ने कहा कि अचानक सामने आए खतरे के कारण चालक को फैसला लेने में परेशानी हो सकती है, लेकिन इससे वह अपने आप लापरवाही के आरोप से मुक्त नहीं हो जाता। चालक को सड़क पर पूरा ध्यान रखना और गाड़ी पर नियंत्रण बनाए रखना जरूरी है।
बीमा कंपनी की अपील खारिज
हाई कोर्ट ने माना कि संबंधित व्यापक बीमा पालिसी के तहत कार में बैठे यात्री को भी सुरक्षा मिली हुई थी। बीमा कंपनी मुआवजे के आदेश में हस्तक्षेप का पर्याप्त आधार नहीं बता सकी। अदालत ने अपील खारिज करते हुए बीमा कंपनी को मुआवजे की शेष 50 प्रतिशत राशि ब्याज सहित जमा करने का निर्देश दिया, ताकि राशि एकमुश्त जारी की जा सके।
कुत्ते को बचाने में डिवाइडर से टकराई थी कार
मामला 28 मई 2014 का है। सतीश चंद्र गुप्ता कार की पिछली सीट पर बैठकर द्वारका से छतरपुर जा रहे थे। वसंत कुंज में छतरपुर मेट्रो स्टेशन के पास सड़क पर अचानक कुत्ता आ गया। उसे बचाने के प्रयास में चालक संजय भाटी ने कार पर से नियंत्रण खो दिया और गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में सतीश चंद्र गुप्ता को गंभीर चोटें आईं। वह दुर्घटना के दिन से 22 अगस्त 2020 तक कोमा में रहे और फिर उनकी मृत्यु हो गई।
बीमा कंपनी ने दी थी चुनौती
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, पटियाला हाउस कोर्ट ने 26 मई 2016 को 1,70,86,530 रुपये मुआवजा और उस पर 12 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी।
कंपनी ने चालक की लापरवाही, कार में बैठे यात्री को बीमा सुरक्षा मिलने और इलाज व देखभाल के खर्च पर सवाल उठाए।
कंपनी ने यह भी दावा किया कि हादसे के समय गुप्ता कार चला रहे थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने एंबुलेंस चालक की गवाही और दुर्घटना से जुड़े रिकॉर्ड पर गौर किया। इनसे पता चला कि गुप्ता पिछली सीट पर बैठे थे और संजय भाटी कार चला रहे थे।
