'पहले आओ, पहले पाओ की नीति अस्वीकार्य', रामलीला मैदान जैसे सार्वजननिक स्थानों के आवंटन पर दिल्ली HC सख्त
दिल्ली हाई कोर्ट ने रामलीला जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के लिए सार्वजनिक मैदानों के आवंटन संबंधी डीडीए की 'पहले आओ, पहले ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट, जागरण।
HighLights
डीडीए की 'पहले आओ, पहले पाओ' नीति मनमानी घोषित।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे कानूनी तौर पर अस्वीकार्य माना।
नीति आवेदकों के लिए असमान अवसर पैदा करती है।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने माना है कि रामलीला और इसी तरह के सांस्कृति व धार्मिक आयोजन के लिए सार्वजनिक मैदानों के आवंटन से संबंधी डीडीए की पहले आओ, पहले पाओ की नीति मनमानी है।
कोर्ट का कहना है कि इसे कानूनी तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि एक मशीनी तौर पर तय की जा सकने वाली नीति जरूरी नहीं कि संवैधानिक रूप से सही हो या सार्वजनिक नीति के हिसाब से हो।
पीठ ने क्या कहा?
पीठ ने कहा कि सी श्रेणी का तय होना और उसकी अंदरूनी समझदारी होना, दो अलग-अलग सवाल हैं। पीठ ने कहा कि ऐसी नीति आवेदकों के लिए अलग-अलग मौके पैदा कर सकती है, खासकर तब जब बुकिंग प्रक्रिया और लागू श्रेणी पहले से लोगों को नहीं बताए गए हों।
आवेदन खारिज करने के आदेश को चुनौती
अदालत ने उक्त टिप्पणी व आदेश रेज ऑफ बिगिनिंग फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका में वार्षीक रामलीला दशहरा महोत्सव आयोजित करने के लिए शिवाजी प्लेस, राजा गार्डन में चंक-सी ग्राउंड के आवंटन के लिए उसकी आवेदन को खारिज करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
