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जिमखाना व दिल्ली गोल्फ क्लब में वसीयत की तरह अगली पीढ़ी को मिलती रही है सदस्यता

Published: Tue, 26 May 2026 09:43 PM (IST)Updated: Tue, 26 May 2026 10:09 PM (IST)

दिल्ली के प्रतिष्ठित जिमखाना और गोल्फ क्लबों की सदस्यता प्रक्रिया विवादों में है। सरकारी अधिकारियों को कम शुल्क और बिना इंतजार के सदस्यता मिलती है।

नए सदस्य बनने के लिए दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता की प्रतीक्षा सूची 40 साल और दिल्ली गोल्फ क्लब की 22 साल तक की है।

नए सदस्य बनने के लिए दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता की प्रतीक्षा सूची 40 साल और दिल्ली गोल्फ क्लब की 22 साल तक की है।

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संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पहले रेस कोर्स क्लब और अब दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने के नोटिस के बाद दिल्ली के ऐसे प्रतिष्ठित क्लबों की गतिविधियां और व्यवस्था चर्चा में हैं।

सवाल उनकी सदस्यता प्रक्रिया और नियमों पर भी उठ रहे हैं। जानकार कहते हैं कि इन प्रतिष्ठित क्लबों की सदस्यता प्रक्रिया को इस तरह बनाया गया है कि केवल चुनिंदा खास वर्ग के लोग ही इसे पूरा कर पाते हैं।

जो एक बार सदस्य बन गया, तो क्लब की सदस्यता उसकी वसीयत की तरह परिवार की अगली पीढ़ी को मिल जाती है। नए सदस्य बनने के लिए दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता की प्रतीक्षा सूची 40 साल और दिल्ली गोल्फ क्लब की 22 साल तक की है।

विवादों में रहा है सदस्यता का मामला

सदस्यता के इन दोहरे और कठिन नियमों की वजह से ही केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब का संचालन अपने कब्जे में लिया था और यहां पर निदेशकों की नियुक्ति की थी। उस समय यही आरोप था कि भाई-भतीजावाद के जरिये सदस्यता दी जा रही थी, जबकि कई वर्षों से लोगों द्वारा जमा कराए गए सदस्यता फार्म और उनकी राशि जमा होने के बावजूद उन्हें सदस्यता नहीं मिल रही थी।

हालांकि, इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और नई सदस्यता के लिए सरकारी अधिकारियों को और वरीयता मिलने लगी। क्लब के एक निदेशक ने पूर्व में पिता के बदले बेटे को दी गई सदस्यता को अवैध बताया था। साथ ही कहा था कि इस तरह के मामलों को सूचीबद्ध किया जा रहा है।

बड़े पद वालों का शुल्क भी बेहद कम

दिल्ली गोल्फ क्लब के पट्टे को केंद्र सरकार ने बीते वर्ष ही 2050 तक के लिए बढ़ाया है, लेकिन दिल्ली जिमखाना क्लब और दिल्ली रेसकोर्स क्लब पर सरकार की कार्रवाई से संकट के बाद दिल्ली गोल्फ क्लब की तरफ भी आ सकते हैं, क्योंकि यहां भी सदस्यता के लिए दिल्ली के संभ्रांत लोगों को दशकों का इंतजार करना पड़ता है। वहीं, दिल्ली में तैनाती मिलने पर आईएएस और आईपीएस के साथ ही आईआरएस अधिकारियों को बहुत जल्द इन क्लबों की सदस्यता मिल जाती है। साथ ही उन्हें इस सदस्यता के लिए अन्य लोगों की अपेक्षा बहुत कम ही शुल्क चुकाना पड़ता है।

सरकारी के लिए 5 लाख और गैर-सरकारी श्रेणी में 22 लाख

दिल्ली जिमखाना क्लब का गैर सरकारी श्रेणी का शुल्क 22 लाख रुपये और टैक्स अतिरिक्त है, जबकि सरकारी श्रेणी में यह शुल्क पांच लाख रुपये और टैक्स है। यहां पर प्रतीक्षा सूची में पंजीकरण कराने के लिए साढ़े सात लाख रुपये की राशि जमा करानी पड़ती है।

दिल्ली गोल्फ क्लब का सदस्यता शुल्क भारतीय नागरिक के लिए 15 लाख रुपये है, जो टैक्स लगाकर 20 लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि सरकारी अधिकारी के लिए स्थायी सदस्यता साढ़े चार लाख रुपये व कर मिलाकर यह राशि छह लाख रुपये होती है।

कोई अधिकारी यदि प्रतिनियुक्ति पर आया है तो उसे दिल्ली में नौकरी पर रहने के दौरान मात्र 25 हजार रुपये और टैक्स मिलाकर ही इसकी सदस्यता मिल जाती है। इन सभी श्रेणियों में वार्षिक शुल्क भी देना होता है।

डीडीए के क्लबों की सदस्यता लेना आसान नहीं

ये तो लुटियंस दिल्ली के क्लब हैं, डीडीए द्वारा संचालित किए जाने वाले तीन क्लब ऐसे हैं, जिनकी सदस्यता लेना भी आसान नहीं है। द्वारका में नया क्लब होने की वजह से डीडीए ने इसकी सदस्यता खोली थी, लेकिन कुतुब गोल्फ क्लब और लेक व्यू गोल्फ क्लब (भलस्वा) में सदस्यता के लिए लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ती है।

गैर सरकारी के लिए यह 5.50 लाख रुपये

डीडीए के गोल्फ द्वारका की बात करें तो यहां पर सरकारी अधिकारी के लिए 3.50 लाख रुपये स्थायी सदस्यता शुल्क है, जबकि गैर सरकारी व्यक्ति के लिए यह शुल्क 7.50 लाख रुपये है। साथ ही वार्षिक शुल्क अलग है। इसी प्रकार कुतुब गोल्फ कोर्स में स्थायी सदस्यता शुल्क सरकारी अधिकारी श्रेणी में 6.49 लाख रुपये कर समेत है, जबकि गैर सरकारी श्रेणी में यह राशि 19.47 लाख रुपये है। लेक व्यू गोल्फ कोर्स की सदस्यता सरकारी के लिए करीब 1.92 लाख रुपये में उपलब्ध है, जबकि गैर सरकारी के लिए यह 5.50 लाख रुपये है।

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