दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली करने के आदेश पर गहराया विवाद, केंद्र से पूछा- क्या मिलेगा वैकल्पिक प्लॉट?
केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली जिमखाना क्लब को 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का आदेश दिए जाने के बाद, क्लब प्रबंधन ...और पढ़ें

दिल्ली जिमखाना क्लब। (सौ- इंटरनेट मीडिया)
HighLights
क्लब ने सरकार से वैकल्पिक भूखंड आवंटन पूछा।
14 हजार सदस्य, 500 कर्मचारी प्रभावित होंगे।
पीएम आवास के पास है क्लब की जमीन।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजधानी के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब और केंद्र सरकार के बीच 27.3 एकड़ जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। केंद्र सरकार द्वारा क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का आदेश दिए जाने के बाद अब क्लब प्रबंधन ने भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) को पत्र लिखकर कई अहम सवाल उठाए हैं। क्लब ने पूछा है कि यदि उसे मौजूदा जगह खाली करनी पड़ती है तो क्या सरकार उसकी पुनर्स्थापना के लिए किसी उपयुक्त वैकल्पिक भूखंड का आवंटन करेगी।
14 हजार सदस्य और 500 कर्मचारी प्रभावित होने की आशंका
दिल्ली जिमखाना क्लब ने अपने पत्र में कहा कि क्लब से करीब 14 हजार सदस्य जुड़े हुए हैं, जिन्होंने सदस्यता और अन्य शुल्क देकर यहां की सुविधाओं का उपयोग किया है। इसके अलावा क्लब में लगभग 500 कर्मचारी कार्यरत हैं। क्लब का कहना है कि अचानक की गई कार्रवाई से हजारों सदस्य और कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा।
क्लब ने सरकार के सामने रखीं चार प्रमुख चिंताएं
क्लब की जनरल कमेटी ने सरकार से कहा कि जब तक कुछ अहम मुद्दों पर स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक क्लब और उसकी गतिविधियों को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। क्लब ने सरकार से पूछा है:
- क्या एलएंडडीओ या आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के पास क्लब को स्थानांतरित करने के लिए किसी वैकल्पिक भूमि का प्रस्ताव है?
- क्लब ने वर्षों में अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं पर भारी निवेश किया है, इस पर विचार किया जाए।
- नई जगह पर क्लब की सुविधाओं और ढांचे को दोबारा विकसित करने में भारी खर्च आएगा।
- कर्मचारियों और उनके परिवारों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
क्लब प्रबंधन ने अपनी चिंताओं पर चर्चा के लिए भूमि विकास अधिकारी से बैठक का भी अनुरोध किया है।
पीएम आवास के पास स्थित है क्लब
दिल्ली जिमखाना क्लब का यह परिसर सफदरजंग रोड पर स्थित है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास लोक कल्याण मार्ग के बेहद करीब है। केंद्र सरकार ने 22 मई को जारी आदेश में कहा था कि यह इलाका अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक महत्व का है तथा यहां रक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है।
सरकार ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए क्लब की लीज समाप्त कर दी है और 5 जून को पूरी जमीन, भवन और अन्य ढांचे का अधिग्रहण कर लिया जाएगा।
कांग्रेस और भाजपा में शुरू हुई सियासत
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि सरकार प्रधानमंत्री आवास परिसर के विस्तार के लिए जिमखाना क्लब की जमीन लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐतिहासिक विरासतों को खत्म करना चाहती है।
वहीं भाजपा नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए इसे “पाखंड और विशेषाधिकार की राजनीति” बताया। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के सरकारी आवासों का जिक्र करते हुए विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया।
कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
क्लब के कर्मचारियों ने भी इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। कई कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने 35-40 वर्षों तक यहां सेवा दी, लेकिन उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं दी गई। अब उन्हें रोजगार और आवास दोनों के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
