PG में कौन, कहां और कैसे रह रहा? दिल्ली सरकार जुटाएगी डिजिटल डेटा; सत्य निकेतन हादसे के बाद उठाया बड़ा कदम
दिल्ली सरकार छात्रों के पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों की सुरक्षा और सुविधाओं का डिजिटल ब्योरा तैयार करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च करेगी।

सत्य निकेतन में इसी जगह गिरा था पांच मंजिला पीजी। फोटो: आर्काइव
HighLights
छात्रों के पीजी आवासों की डिजिटल मैपिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल
सत्य निकेतन घटना के बाद सुरक्षा उपायों पर सरकार का जोर
100 पीजी की जांच, सीसीटीवी और नियामक व्यवस्था प्रस्तावित
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में छात्र किस इलाके में, किस तरह के पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास में रह रहे हैं और वहां उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं मिल रही हैं, इसका जल्द डिजिटल ब्योरा तैयार किया जाएगा।
दिल्ली सरकार छात्रों के पीजी आवासों की मैपिंग के लिए एक सरल आनलाइन पोर्टल लॉन्च करने जा रही है। इसमें कमरों की संख्या, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और आवास से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारी दर्ज की जाएगी।
सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद छात्र आवास को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में गुरुवार को छात्र आवास एवं सुरक्षा से संबंधित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की दूसरी बैठक हुई।
बैठक में डीडीए, एमसीडी, दिल्ली पुलिस और दिल्ली के विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में पीजी आवासों के नियमन के साथ तत्काल जमीनी कार्रवाई पर भी निर्णय लिए गए।
100 पीजी की तीन दिन में जांच
एमसीडी और डीडीए की संयुक्त टीमें अगले तीन दिनों में चिन्हित 100 मामलों का निरीक्षण करेंगी। इस दौरान पीजी में सुरक्षा मानकों और कानूनी प्रावधानों के पालन की जांच होगी।
इससे नियमों के उल्लंघन वाले आवासों की पहचान करने में मदद मिलेगी। सरकार ने मास्टर प्लान और डीएमसी एक्ट के प्रावधानों की समीक्षा के लिए उप-समिति गठित की है।
इसमें डीडीए, दिल्ली सरकार, एमसीडी और डीयू कुलगुरु के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के पांच से छह किलोमीटर के दायरे तथा ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और आरडब्ल्यूए क्षेत्रों में कानूनी और सुरक्षित पीजी संचालन की संभावनाएं देखेगी।
प्रवेश और कामन एरिया में सीसीटीवी प्रस्तावित
भविष्य की व्यवस्था में पीजी के प्रवेश, निकास और कामन एरिया में सीसीटीवी अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। रिकॉर्डिंग का 40 से 45 दिन का बैकअप रखने का सुझाव दिया गया है।
हालांकि, छात्रों की निजी जगहों की गोपनीयता सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है। डीयू और एमसीडी अगले दो से चार दिनों में पोर्टल का प्रारंभिक परीक्षण करेंगे।
इसके बाद छात्रों के पंजीकरण के लिए अभियान चलाया जाएगा। दशहरा के बाद एचपीसी की अगली बैठक में उप-समिति की रिपोर्ट के आधार पर पीजी और छात्र आवासों के लिए प्रस्तावित नियामक व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी।
