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छात्रों के लिए बनेगा सुरक्षित आवास, PG-हॉस्टल सुरक्षा पर बनी हाई-लेवल कमेटी; 60 दिन में देनी हैं शिफारिशें

Published: Thu, 10 Sep 2026 02:46 PM (IST)

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त आवास सुनिश्चित करने हेतु उपराज्यपाल ने एक 18 सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति को मंजूरी दी है।

पीजी और हॉस्टल के लिए दिल्ली सरकार लाएगी पॉलिसी। फोटो: आर्काइव

पीजी और हॉस्टल के लिए दिल्ली सरकार लाएगी पॉलिसी। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्र आवास सुरक्षा पर समिति

  2. 18 सदस्यीय समिति 60 दिनों में देगी अपनी सिफारिशें

  3. सुरक्षित, पर्याप्त छात्र आवास और नीतिगत दिशा तय होगी

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त आवास उपलब्ध कराने की कवायद शुरू हो गई है।

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में 18 सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति के गठन को मंजूरी दी है। समिति छात्र आवास की कमी का आकलन करने के साथ सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के लिए नीतिगत दिशा और अंतर-विभागीय समन्वय तय करेगी।

सत्य निकेतन हादसे के बाद शुरू कवायद

सत्य निकेतन की घटना के बाद उपराज्यपाल ने सात सितंबर को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद के साथ बैठक की थी।

इसमें पीजी के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों की समीक्षा करने, विश्वविद्यालयों, एमसीडी और डीडीए के माध्यम से वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने और खाली पड़े सरकारी भवनों को छात्रों के आवास के लिए इस्तेमाल करने की व्यवहार्यता का आकलन करने के निर्देश दिए गए थे।

प्रस्तावित समिति छात्र आवास और सुरक्षा से जुड़े उपायों की निगरानी के साथ नीतिगत दिशा और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगी।

60 दिनों में सिफारिशें देगी उच्चस्तरीय समिति

समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत दिल्ली में छात्रों की संख्या के मुकाबले छात्रावासों की कमी का आकलन किया जाएगा।

साथ ही विश्वविद्यालयों, एमसीडी, डीडीए और अन्य सरकारी एजेंसियों के माध्यम से छात्र आवास के निर्माण या विस्तार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। खाली या कम उपयोग वाले डीडीए आवास और अन्य उपयुक्त सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल की व्यवहार्यता भी जांची जाएगी।

छात्रावास कमी और सरकारी भवनों का आकलन

समिति ऐसी सरकारी भूमि और इमारतों की पहचान करेगी, जिनका इस्तेमाल अतिरिक्त छात्रावास या छात्र आवास विकसित करने के लिए किया जा सकता है।

विश्वविद्यालयों और संस्थानों को छात्रों के लिए सुरक्षित, सस्ता और पर्याप्त रूप से विनियमित छात्रावास सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उपाय भी सुझाए जाएंगे।

इसके अलावा छात्र आवास सुविधाओं का केंद्रीकृत डेटाबेस विकसित करने पर सुझाव दिए जाएंगे। इसमें संस्थागत छात्रावास और पंजीकृत पीजी आवास शामिल होंगे।

सुरक्षित आवास के लिए बनेगा केंद्रीकृत डेटाबेस

समिति ऐसे तंत्र का सुझाव देगी, जिसके जरिए छात्र असुरक्षित आवास, भीड़भाड़, आग के खतरे या अन्य गंभीर सुरक्षा चिंताओं की रिपोर्ट कर सकें और उन पर समयबद्ध कार्रवाई हो सके। इसके लिए केंद्रीकृत डिजिटल निगरानी या डैशबोर्ड विकसित करने का सुझाव भी दिया जाएगा।

छात्रावासों में मानक आपातकालीन निकासी और आपदा-प्रतिक्रिया प्रोटोकाल तय करने के साथ छात्रों, छात्रावास वार्डन, विश्वविद्यालय अधिकारियों और पीजी संचालकों के लिए समय-समय पर अग्नि एवं आपदा माक ड्रिल तथा सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम सुनिश्चित करने का तंत्र तैयार किया जाएगा।

18 सदस्यीय समिति में प्रमुख विभाग शामिल

समिति में दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री अध्यक्ष होंगे, जबकि प्रधान सचिव/सचिव शिक्षा सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, अध्यक्ष एनडीएमसी, आयुक्त एमसीडी, उपाध्यक्ष डीडीए और गृह, राजस्व, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शहरी विकास, कानून और पीडब्ल्यूडी विभागों के प्रधान सचिव/सचिव सदस्य होंगे।

समिति में दिल्ली अग्निशमन सेवा के मुख्य अग्निशमन अधिकारी, दिल्ली विश्वविद्यालय, जीजीएसआइपी विश्वविद्यालय, अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली और एनएसयूटी के कुलपति भी सदस्य होंगे।

समिति को जरूरत के अनुसार किसी अन्य अधिकारी, विभाग, एजेंसी, तकनीकी विशेषज्ञ या संस्थागत प्रतिनिधि को शामिल करने का अधिकार भी दिया गया है।

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