कितना मजबूत है राजधानी का फायर सिस्टम? चुनौतियों के बीच बढ़ रहे हादसे; चौंका देंगे ये आंकड़े
दिल्ली में आग बुझाने के दौरान दमकलकर्मी संसाधनों और आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण घायल हो रहे हैं।
-1780794245304_m.webp)
दिल्ली के मालवीय नगर में हाल ही में लगी आग। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ रही आग की घटनाओं के बीच अग्निशमन विभाग के कर्मियों की सुरक्षा भी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।
आग बुझाने के दौरान दमकलकर्मी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान-माल की रक्षा करते हैं, लेकिन संसाधनों और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की कमी उनके लिए चुनौती और बढ़ा रही है।
हाल के दिनों में आग लगने की कई बड़ी घटनाओं के दौरान राहत कार्य करते समय दमकलकर्मी घायल हुए हैं। इन्हीं पर आग पर काबू पाने के साथ लोगों को सुरक्षित निकालने का जिम्मा भी होता है।
सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया
ऐसे में माना जाता है कि जब ये इस तरह के आपरेशन में जाएं तो सुरक्षा के सभी उपकरण उनके पास हों, जबकि ऐसा नहीं है। शुक्रवार को भी ग्रेटर कैलाश-1 स्थित टाटा कम्युनिकेशंस के कार्यालय में भीषण आग पर काबू पाने के दौरान मथुरा रोड फायर स्टेशन के दो फायर आपरेटर संदीप और सुरेश गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें तुरंत उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
दिल्ली अग्निशमन विभाग लंबे समय से आधुनिक अग्निशमन उपकरणों, फायर स्टेशनों के साथ ही अग्निशमन कर्मियों की कमी से भी जूझ रहा है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में दिल्ली में करीब 2500 दमकलकर्मी तैनात हैं, जबकि मानकों के अनुसार राजधानी जैसे महानगर में लगभग 12 हजार अग्निशमनकर्मियों की आवश्यकता है।
कर्मियों की संख्या बेहद कम मानी जा रही
वहीं, बढ़ती आबादी, ऊंची इमारतों और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के मुकाबले कर्मियों की संख्या बेहद कम मानी जा रही है। इसी प्रकार विभाग के पास वर्तमान में 323 फायर फाइटिंग उपकरण उपलब्ध हैं, जबकि आवश्यकता लगभग 600 उपकरणों की बताई जा रही है।
इसी तरह, दिल्ली में वर्तमान में दिल्ली में 71 फायर स्टेशन संचालित हो रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार राजधानी के सभी क्षेत्रों तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 120 फायर स्टेशनों की आवश्यकता है।
कई बाहरी और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में फायर स्टेशनों की कमी के कारण दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग जाता है।
फायर स्टेशन और प्रशिक्षित मानव संसाधन समय की मांग
दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सीमित संसाधनों के बावजूद विभाग के कर्मी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं। हालांकि, बढ़ती आग की घटनाओं और बदलते शहरी ढांचे को देखते हुए विभाग को अतिरिक्त बजट, आधुनिक उपकरण, नए फायर स्टेशन और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराना समय की मांग बन गया है।
इससे न केवल नागरिकों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि आग से लड़ने वाले दमकलकर्मियों की जान भी बेहतर तरीके से सुरक्षित रह सकेगी।
यह भी पढ़ें- मालवीय नगर अग्निकांड: होटल के भूतल से शुरू हुई थी आग, वजह अब तक स्पष्ट नहीं; जांच में कई बड़े खुलासे
यह भी पढ़ें- मालवीय नगर अग्निकांड: होटल मालिक का 'बांग्लादेशी' कनेक्शन, देश को खतरे में डालने के लिए जा चुका है जेल
दमकलकर्मियों के झुलसने और घायल होने की घटनाएं
- 3 जून : मालवीय नगर के हौजरानी इलाके में स्थित रेस्त्रां में आग पर काबू पाने और लोगों को बचाने की कोशिश के दौरान कई दमकलकर्मी घायल हुए थे।
- मार्च 2026 : बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में एक प्लाईवुड गोदाम में लगी भीषण आग पर काबू पाते समय दमकलकर्मी मामूली रूप से घायल हुआ था।
- जुलाई 2025 : सदर बाजार के रिहायशी और व्यावसायिक इलाके में लगी आग के दौरान आपरेशन में एक दमकलकर्मी घायल हुआ था।
दमकलकर्मियों के झुलसने और घायल होने के मुख्य कारण
- बैटरी और केमिकल ब्लास्ट: हालिया जीके-1 की घटना की तरह, बैटरी रूम या बेसमेंट में रखे इलेक्ट्रानिक उपकरणों में विस्फोट होने से अचानक लपटें तेज होती हैं, जिससे सीधे संपर्क में आने वाले दमकलकर्मी झुलस जाते हैं।
- अवैध निर्माण और संकरी गलियां: पुरानी दिल्ली, तंग बाजारों (जैसे चांदनी चौक, सदर बाजार) या अवैध रूप से चल रही फैक्ट्रियों में वेंटिलेशन न होने के कारण अंदर का तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है। बैकड्राफ्ट (अचानक आक्सीजन मिलने से होने वाला विस्फोट) के कारण सबसे ज्यादा दमकलकर्मी घायल होते हैं।
- सुरक्षात्मक गियर (पीपीई) की सीमा: दमकलकर्मी फायर-सूट पहनते हैं, लेकिन अत्यधिक ऊंचे तापमान और लगातार कई घंटों तक कूलिंग आपरेशन चलाने के कारण हाथों और चेहरे पर थर्मल बर्न का खतरा हमेशा बना रहता है।
