नई दिल्ली। राजधानी में पिछले सात महीनों में 2400 टन से ज्यादा कोविड-19 महामारी का कचरा निकला है। कोविड कचरे के मामले में दिल्ली छठवें स्थान पर है। देश में सबसे ज्यादा कोविड-19 मरीजों का कचरा महाराष्ट्र में निकला है। कोविड कचरे से संक्रमण फैलने की गंभीरता के मददेनजर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने इस कचरे पर शुरू से ही निगरानी शुरू कर दी थी।

सीपीसीबी ओर से सभी स्थानीय निकायों, अस्पतालों, कोविड केयर सेंटर, आइसोलेशन सेंटर इत्यादि के लिए बाकायदा दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। इन सभी जगहों से निकलने वाला बायो-मेडिकल कचरा एकत्र कर कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (सीबीडब्ल्यूटीएफ) में भेजा जाता है। जहां पर बेहद उच्च तापमान पर इसे जला दिया जाता है।

सीपीसीबी से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल जून से लेकर दिसंबर तक सात माह में देश भर में 32 हजार 994 टन कोविड-19 कचरा निकला है। इस पूरे कचरे को ट्रीटमेंट के लिए देश में मौजूद 198 सीबीडब्ल्यूटीएफ में निस्तारित किया गया। अक्तूबर के महीने में कोरोना महामारी से देश के बड़े हिस्से में लोग प्रभावित थे। इसका असर कोविड-19 कचरे भी देखा जा सकता है। अक्तूबर में सबसे ज्यादा 55 सौ टन कोविड कचरा निकला है। 

आठ राज्यों में निकला सबसे ज्यादा कचरा 

महाराष्ट्र में अब तक सबसे ज्यादा कोविड-19 का कचरा निकला है। सीपीसीबी के मुताबिक सात महीनों के दौरान महाराष्ट्र में पांच हजार 367 टन कचरा निकला है। जबकि, केरल में 3300 टन, गुजरात में 3086 टन, तमिलनाडु में 2806 टन, उत्तर प्रदेश में 2502 टन, दिल्ली में 2471 टन, पश्चिम बंगाल में 2095 टन और कर्नाटक में 2026 टन कोविड कचरा निकला है। केवल दिसंबर महीने में ही देश भर में चार हजार 530 टन कोविड कचरा निकला है। महाराष्ट्र में दिसंबर महीने में 629 टन, केरल में 542 टन, गुजरात में 479 टन और दिल्ली में 321 टन कोविड कचरा निकला है।

कोविड कचरे में ये सब हैं शामिल 

कोविड-19 के कचरे में मरीज के इस्तेमाल और उसके उपचार से जुड़ी तमाम चीजों को रखा जाता है। इसमें पीपीई किट, मास्क, जूते के कवर, दस्ताने, ह्यूमन टिश्यू, रक्त लगी हुई सामग्री, ड्रे¨सग मंल इस्तेमाल चीजें, इस्तेमाल हुई रूई, ब्लड बैग, नीडिल और सी¨रज आदि शामिल हैं। इस पूरे कचरे पर मोबाइल एप के जरिए निगरानी की जाती है। 

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